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अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा बढ़ाई, ट्रम्प का सख्त आदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। यह आदेश अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है। जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है। जानें इस स्थिति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

अमेरिकी राष्ट्रपति का नया आदेश

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी नौसेना को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कोई नाव समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाते हुए दिखाई देती है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाए। यह आदेश उस समय जारी किया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य इस विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र में माइन हटाने का कार्य कर रहा है और अब इसे तीन गुना बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। यह कदम समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।


इस बीच, स्थिति और भी गंभीर हो गई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, जहाजों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 96% तक घट गई है।


पहले जहां रोजाना लगभग 120 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर औसतन 4-5 जहाज प्रतिदिन रह गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में तनाव कितना बढ़ चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच 'डबल नाकेबंदी' जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। ईरान ने कुछ समय के लिए रास्ता खोलने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में इसे फिर से बंद कर दिया, यह कहते हुए कि अमेरिकी नाकेबंदी जारी है।


स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जहाजों पर हमले और सुरक्षा घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।


कुल मिलाकर, होर्मुज़ अब दुनिया का सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री क्षेत्र बन गया है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और ऊर्जा संकट पर पड़ेगा। होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। यदि यहां माइन बिछाई जाती है, तो जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से रुक सकती है और वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, ताकि व्यापारिक जहाजों और तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखा जा सके।