अमेरिका ने ईरान को सैन्य हमले की चेतावनी दी, वार्ता में कोई प्रगति नहीं
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की कड़ी चेतावनी
स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता गुरुवार को बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई। यह वार्ता तीसरे दौर में थी, जिसमें दोनों पक्षों ने कई घंटों तक चर्चा की, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन पाई।
अमेरिका ने ईरान से अपनी प्रमुख परमाणु सुविधाओं, जैसे फोर्डो, नतांज और इस्फहान, को पूरी तरह से नष्ट करने की मांग की। इसके अलावा, उसने उच्च समृद्ध यूरेनियम को अमेरिका या अन्य देशों को भेजने और बिना किसी समय सीमा के स्थायी समझौते की भी मांग की। अमेरिका ने न्यूनतम प्रतिबंध राहत की पेशकश की, जबकि ईरान ने सभी अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को हटाने की मांग की और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर जोर दिया। ईरान ने अमेरिका की मांगों को ठुकरा दिया।
मध्यस्थ ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बूसईदी ने वार्ता को सकारात्मक और महत्वपूर्ण प्रगति वाला बताया और अगले सप्ताह वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखने की घोषणा की। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वह ईरान के रुख से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई अपरिहार्य हो सकती है, जिससे मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। अमेरिका ने पहले ही मध्य पूर्व में इराक युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती की है, जिसमें विमानवाहक पोत, युद्धपोत और हजारों सैनिक शामिल हैं।
ईरान ने भी कहा है कि किसी भी हमले का जवाब विनाशकारी युद्ध से दिया जाएगा, जिसमें क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकाने निशाना बन सकते हैं। ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता वाला बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि वार्ता की असफलता से तनाव और बढ़ सकता है। यदि अगले दौर में भी कोई सफलता नहीं मिली, तो अमेरिका या इजराइल द्वारा सीमित या बड़े पैमाने पर हमले की संभावना बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और कई देश अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।
यह स्थिति मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है, जहां पहले से ही इजराइल-ईरान तनाव और प्रॉक्सी संघर्ष जारी हैं।