अमेरिका-चीन व्यापार संघर्ष: ताइवान के साथ नया समझौता
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तनाव
अमेरिका और चीन के बीच की प्रतिकूलता अब 'शीत युद्ध 2.0' के रूप में विकसित हो चुकी है। यह विवाद अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तकनीकी, जासूसी और सैन्य शक्ति के वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। हाल ही में, अमेरिका और ताइवान ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
ताइवान के साथ व्यापार समझौता
अमेरिका और ताइवान ने एक व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत ताइवान की वस्तुओं पर शुल्क में कमी की जाएगी। इसके बदले, ताइवान अमेरिका में 250 अरब अमेरिकी डॉलर का नया निवेश करेगा। यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'व्यापार असंतुलन दूर करने' की नीति के तहत किया गया है।
शुल्क में कमी और निवेश
इस समझौते के तहत, ताइवान की कंपनियाँ, विशेषकर TSMC, अमेरिका में उन्नत सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्र में $250 अरब का प्रत्यक्ष निवेश करेंगी। इसके अलावा, ताइवान सरकार $250 अरब की क्रेडिट गारंटी भी प्रदान करेगी। अमेरिका ने ताइवानी सामानों पर आयात शुल्क को 20% से घटाकर 15% कर दिया है।
चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने इस समझौते को ताइवान का 'आर्थिक शोषण' करार दिया है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने इसे एक 'आर्थिक साझेदारी' के रूप में देखा है, जो अमेरिका में कई 'विश्व स्तरीय' औद्योगिक पार्कों के निर्माण को बढ़ावा देगा।
भविष्य की चुनौतियाँ
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इसके साथ ही दक्षिण चीन सागर में भी तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने चीन को उन्नत एआई चिप्स और उपकरणों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे तकनीकी और सैन्य प्रगति को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।