अमेरिका का मैक्सिको की खाड़ी में नया तेल प्रोजेक्ट, भारत के लिए संभावनाएं
वॉशिंगटन में तेल आपूर्ति की नई दिशा
वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में स्थिति जटिल बनी हुई है। ईरान ने अपने मित्र देशों को इस क्षेत्र से निकलने की अनुमति दे दी है, लेकिन तेल की आपूर्ति पहले जैसी नहीं हो रही है। इस बीच, अमेरिका ने 'मैक्सिको की खाड़ी' में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
नया मिडिल ईस्ट बनाने की योजना
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र को एक नए मिडिल ईस्ट के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है, जहां से LPG और पेट्रोल का निर्यात किया जाएगा। यह भारत के लिए एक सस्ता और सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के इस गल्फ में बड़े व्यवसायी पहले से ही निवेश करने लगे हैं।
तेल कंपनियों की रुचि
दुनिया की प्रमुख ऊर्जा कंपनियां अमेरिका के इस अल्ट्रा-डीपवाटर प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी खरीदने के लिए उत्सुक हैं। यूरोप की कंपनियां जैसे TotalEnergies और Shell, साथ ही BP और Repsol भी इस दौड़ में शामिल हैं।
शेननडोह फील्ड की संभावनाएं
'शेननडोह' फील्ड के मौजूदा मालिक अपनी 51% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। आने वाले हफ्तों में बिड्स लगाई जा सकती हैं। मिडिल ईस्ट और एशिया के बड़े तेल उत्पादक भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं, जिससे भारत के लिए तेल और LPG की नई आपूर्ति के रास्ते खुल सकते हैं।
तेल उत्पादन की क्षमता
यह क्षेत्र कोई साधारण ऑयल फील्ड नहीं है। यह समुद्र की गहराई में स्थित है, जहां तेल और गैस के भंडार लगभग 30,000 फीट नीचे हैं। यहां का दबाव 20,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद, उत्पादन जुलाई में शुरू हो चुका है और प्रतिदिन 1,00,000 बैरल तेल निकाला जा रहा है।
भारत के लिए संभावित लाभ
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका का यह नया क्षेत्र तेल का एक नया केंद्र बनता जा रहा है। जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कीमतें बढ़ती हैं, तब अमेरिका से अधिक उत्पादन बाजार को संतुलित रखने में मदद करेगा। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए यह 'एनर्जी सिक्योरिटी' की एक महत्वपूर्ण गारंटी हो सकती है।