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अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर वार्ता में प्रगति

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में सकारात्मक संकेत दिए हैं, जिसमें जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जल्द ही इस पर घोषणा कर सकते हैं। ईरान के साथ संभावित समझौते में युद्धविराम बढ़ाने और तेल बेचने की अनुमति शामिल है, लेकिन परमाणु हथियारों पर कोई चर्चा नहीं हुई है। भारत ने अमेरिका-ईरान संकट में मध्यस्थता करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
 

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने दिल्ली में कहा कि इस मुद्दे पर प्रगति हो रही है, जिससे जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस संबंध में जल्द घोषणा कर सकते हैं। ट्रंप ने पहले कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत काफी हद तक हो चुकी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वार्ताकारों को सलाह दी कि ईरान के साथ समझौते में जल्दबाजी न करें, और यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत के लिए समय हमारे पक्ष में है। इसके अलावा, उन्होंने सऊदी अरब, UAE, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, इजिप्ट, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की मेज़बानी की उम्मीद जताई है.


ईरान का रुख

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित समझौते में 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत होर्मुज को फिर से खोला जाएगा और ईरान को तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि इस समझौते में परमाणु हथियारों पर कोई चर्चा नहीं हुई है.


भारत की स्थिति

रुबियो ने यह भी बताया कि भारत पाकिस्तान के संदर्भ में चिंतित है, लेकिन अमेरिका-ईरान संकट में मध्यस्थता करने पर उसने कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहता है कि पाकिस्तानी क्षेत्र से आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो भारत को निशाना बनाते हैं। हालांकि, ईरान संकट में भारत की भूमिका पर कभी चर्चा नहीं हुई।