अमेरिका और ईरान के बीच तनाव: केशम द्वीप पर सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेना की सीमित कार्रवाई
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी सेना ने 2 नवंबर को ईरान के केशम द्वीप पर सीमित हमले किए। यह कार्रवाई उस समय हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते के संकेत दिए। जबकि बातचीत की संभावनाएं बढ़ रही हैं, अमेरिकी हमलों ने क्षेत्र में नई चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।
केशम द्वीप पर धमाकों की सूचना
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, केशम द्वीप पर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कुछ रिपोर्टों में पास के बंदर लंगेह क्षेत्र में भी विस्फोटों की जानकारी दी गई। अमेरिकी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर की गई।
रक्षात्मक कार्रवाई का दावा
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य संसाधनों को संभावित खतरे से बचाना था। इसे रक्षात्मक कार्रवाई के रूप में वर्णित किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि यह कदम ईरानी बलों द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के उपयोग के जवाब में उठाया गया। हालांकि, इस कार्रवाई से हुए नुकसान की जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप का सकारात्मक संकेत
हमले की खबरों के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावनाओं को उजागर किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान जल्द समझौता चाहता है। ट्रंप ने तेल की कीमतों में गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजार को उम्मीद है कि ईरान के साथ बड़ा युद्ध नहीं होगा।
बड़े युद्ध की संभावना से इनकार
अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को सीमित बताया है और कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने बड़े स्तर पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका उसकी शर्तें मानता है, तो जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की योजना पर जल्द अमल किया जा सकता है।
क्या तनाव फिर बढ़ेगा?
केशम द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद, पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। एक ओर दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां तनाव कम करने में बाधा बन रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे बड़े युद्ध की शुरुआत नहीं बताया है।