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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। इस वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और लेबनान पर हमलों को रोकने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने जो बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, उन्हें खोजने में असमर्थ है। जानें इस वार्ता के संभावित परिणाम और ईरान की चुनौतियाँ।
 

शांति वार्ता की तैयारी

वॉशिंगटन। आज इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। इस बैठक में लेबनान पर हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। इस बीच, अमेरिका का कहना है कि ईरान ने जो बारूदी सुरंगें होर्मुज में बिछाई थीं, उन्हें अब खुद ही खोजने में असमर्थ है।


ईरान की चुनौतियाँ

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान कई प्रयासों के बावजूद जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने में असफल रहा है। इसकी मुख्य वजह वह समुद्री बारूदी सुरंगें हैं, जो ईरान ने पहले बिछाई थीं।


वार्ता में उठने वाले मुद्दे

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति ईरान के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। अमेरिका ने मांग की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से आवागमन के लिए खोला जाए। यह मुद्दा पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में ईरानी प्रतिनिधियों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले दल के बीच चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है।


बारूदी सुरंगों का प्रभाव

ईरान ने अमेरिका-इस्राइल के खिलाफ युद्ध के दौरान छोटी नावों का उपयोग कर होर्मुज में बारूदी सुरंगों का जाल बिछाया था। इन सुरंगों के साथ-साथ ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या में कमी ला दी। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि हुई और ईरान को युद्ध में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला। हालांकि, ईरान ने एक मार्ग खुला रखा था, जिससे शुल्क का भुगतान करने वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति मिली।