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अमेरिका-ईरान वार्ता में विफलता: समझौता नहीं हो सका

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद उत्पन्न हुए, जैसे कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम। जानें इस वार्ता के विफल होने के पीछे के कारण और जेडी वेंस के बयान के बारे में।
 

इस्लामाबाद में वार्ता का अंत

इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता अब समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। वेंस ने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है और उन्होंने कहा, 'हम वापस जा रहे हैं।' इस सप्ताह की शुरुआत में हुए युद्धविराम के बाद दोनों पक्ष शनिवार को इस्लामाबाद में मिले थे, लेकिन लगभग 15 घंटे की लंबी बैठक के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई।


ईरान की रेड लाइंस

वेंस ने कहा कि ईरान को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि किन मुद्दों पर अमेरिका सहमत हो सकता है और किन पर नहीं। उन्होंने कहा, 'हमने जितना संभव हो सके, अपनी शर्तें स्पष्ट की हैं।' लेकिन ईरान ने इन शर्तों को मानने का निर्णय नहीं लिया।


बातचीत में बाधा डालने वाले मुद्दे

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में निम्नलिखित मुद्दों पर मतभेद उत्पन्न हुए हैं: 1- ईरान का यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम, 2- होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग, 3- लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान।


ईरान का आरोप

ईरान की सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त मांगें रख दीं, जिससे बातचीत में रुकावट आई। संवाददाता ने बताया कि ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत के बाद एक साझा ढांचे के लिए टेक्स्ट के आदान-प्रदान का चरण शुरू हुआ था।


जेडी वेंस का बयान

जब जेडी वेंस से पूछा गया कि ईरान ने कौन सी शर्त मानने से इनकार किया है, तो उन्होंने विस्तार में जाने से मना कर दिया। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश न करे। उन्होंने कहा, 'हमें पक्की गारंटी चाहिए कि वे ऐसा नहीं करेंगे।'


अमेरिका का मुख्य लक्ष्य

वेंस ने यह भी कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान ऐसे साधनों को हासिल करने की कोशिश न करे, जिससे वह तेजी से परमाणु हथियार बना सके। यही अमेरिकी राष्ट्रपति का प्राथमिक लक्ष्य है और इस वार्ता के माध्यम से इसे हासिल करने का प्रयास किया गया।