अमरावती में नाबालिगों के शोषण का मामला: पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
अमरावती में छिपा खौफनाक सच
महाराष्ट्र के अमरावती शहर में एक साधारण फ्लैट के पीछे छिपा एक भयावह सच अब सबके सामने आ चुका है। कटोरा नाका क्षेत्र में स्थित इस फ्लैट को लगभग 200 नाबालिगों के शोषण और अश्लील वीडियो बनाने का केंद्र माना जा रहा है। स्थानीय लोग इसे "बुराइयों का अड्डा" कह रहे हैं।
पड़ोसियों की गवाही: संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
इमारत के निवासियों के अनुसार, इस फ्लैट में संदिग्ध गतिविधियां कई महीनों से चल रही थीं। दूसरी मंजिल पर रहने वाले श्रीकांत मक्केश्वर ने बताया कि अक्सर 18-19 साल की युवतियां देर रात तक फ्लैट में रुकती थीं। ये लड़कियां अक्सर बुर्के या दुपट्टे से अपना चेहरा ढककर आती थीं, जिससे उनकी पहचान छिपी रहे।
निवासियों ने कई बार फ्लैट की मालिक को इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दी, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। अब लोग मांग कर रहे हैं कि इस निष्क्रियता के लिए मालिक पर भी कार्रवाई की जाए।
देर रात की हलचल ने बढ़ाई चिंता
पड़ोसियों का कहना है कि फ्लैट में अजीब समय पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां आते-जाते थे। श्रीकांत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को नजरअंदाज करना संभव नहीं था।
उन्होंने बताया, "युवतियां, जिनकी उम्र अक्सर 18-19 साल होती थी, यहां आती थीं और देर रात तक रुकती थीं। हमने इस बारे में फ्लैट की मालिक को बताया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया।"
मालकिन की निष्क्रियता पर सवाल
निवासियों की कई शिकायतों के बावजूद, फ्लैट की मालकिन ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया है।
मक्केश्वर ने आरोप लगाया कि मालकिन की निष्क्रियता के कारण ही आरोपी अपनी गतिविधियों को जारी रख सके। उन्होंने कहा, "ऐसे कामों में शामिल लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। फ्लैट की मालकिन को भी आरोपी बनाया जाना चाहिए।"
पुलिस ने किया फ्लैट सील
पुलिस की एक टीम हाल ही में फ्लैट पर पहुंची, लेकिन तब तक वहां रहने वाला एक व्यक्ति भाग चुका था।
पुलिस ने उस फ्लैट को चारों ओर से घेरकर सील कर दिया है, क्योंकि इसे एक महत्वपूर्ण 'क्राइम सीन' माना जा रहा है।
आठ लोगों की गिरफ्तारी
अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह मामला सोशल मीडिया पर नाबालिग लड़कियों के अश्लील वीडियो क्लिप और तस्वीरें फैलाने से जुड़ा है।
पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद ने बताया कि जांच तब शुरू हुई जब 11 अप्रैल को ऐसे वीडियो ऑनलाइन सामने आए।
शोषण के पैमाने की जांच जारी
हालांकि पुलिस ने अब तक आठ पीड़ितों की पहचान की है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि शोषण का पैमाना कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।
यह मामला 'भारतीय न्याय संहिता', 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम' (POCSO Act) और 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' के तहत दर्ज किया गया है।
पीड़ितों से अपील
पुलिस ने पीड़ितों और उनके परिवारों से आगे आने और अपने बयान दर्ज कराने की अपील की है। उन्हें गोपनीयता और सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है।