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अबू सलेम को दो दिन की आपातकालीन पैरोल, परिवार से मिलने की अनुमति

अबू सलेम को दो दिन की आपातकालीन पैरोल मिली है, जिससे वह अपने परिवार से मिल सकेंगे। यह निर्णय उनके भाई के निधन के बाद लिया गया है। हालांकि, उनके वकील ने इस पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि दो दिन में यात्रा करना संभव नहीं है। अदालत ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत की दलीलें।
 

जेल नियमों पर बहस और अबू सलेम का मामला

जेल नियमों और मानवीय आधार पर मिलने वाली राहत को लेकर चर्चा एक बार फिर गर्म हो गई है। इस संदर्भ में, 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है।


महाराष्ट्र सरकार का निर्णय

हालिया जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने अबू सलेम को परिवार से मिलने के लिए दो दिन की आपातकालीन पैरोल देने पर सहमति जताई है। यह निर्णय उनके भाई अबू हकीम अंसारी के निधन के बाद लिया गया, जिनका निधन पिछले साल नवंबर में हुआ था। उल्लेखनीय है कि सलेम ने 14 दिन की आपात पैरोल की मांग की थी।


बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान, बॉम्बे हाईकोर्ट में राज्य के मुख्य लोक अभियोजक मंकुवर देशमुख ने अदालत को बताया कि सरकार ने विचार के बाद केवल दो दिन की आपात पैरोल देने का निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की खंडपीठ को यह भी बताया गया कि अबू सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी हैं, इसलिए उन्हें बिना सुरक्षा दस्ते के रिहा नहीं किया जा सकता।


सलेम के वकील की आपत्ति

सलेम की ओर से पेश वकील फरहाना शाह ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मुंबई से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाकर परिवार से मिलना और फिर वापस लौटना दो दिन में व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल पिछले लगभग 25 वर्षों से जेल में हैं और उन्हें पहले केवल मां और सौतेली मां के निधन पर ही कुछ दिनों की पैरोल मिली थी।


सुरक्षा एस्कॉर्ट पर चिंता

इसके अतिरिक्त, वकील ने सुरक्षा एस्कॉर्ट के खर्च को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस पर लाखों रुपये का खर्च आ सकता है, जो अनुचित है। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि मानवीय आधार पर सलेम को बिना एस्कॉर्ट पैरोल दी जानी चाहिए।


अगली सुनवाई

फिलहाल, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है। इस पर आगे निर्णय लिया जाना बाकी है, जो आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा और पूरे मामले की दिशा तय करेगा।