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अन्ना हजारे की राजनीतिक दल-बदल पर कड़ी प्रतिक्रिया

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने राघव चड्ढा द्वारा आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की आलोचना की है। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए अनुचित बताया और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ कहा। हजारे ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुसार कार्य करने की सलाह दी। इस बीच, आम आदमी पार्टी ने इस घटनाक्रम के जवाब में नई रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।
 

राजनीतिक दल-बदल पर अन्ना हजारे की टिप्पणी

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए इस तरह का राजनीतिक परिवर्तन अनुचित है और यह संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। हजारे ने यह भी बताया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुसार कार्य करना चाहिए और व्यक्तिगत लाभ के लिए निर्णय लेने से बचना चाहिए, साथ ही लोकतांत्रिक नैतिकता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।


 


महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मीडिया से बातचीत करते हुए हजारे ने कहा कि एक पार्टी छोड़कर दूसरी में शामिल होना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिक दल बदलना उचित नहीं है और हमारे संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने संविधान की सर्वोच्चता पर बल दिया और कहा कि देश संविधान के आधार पर चलता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी सही दिशा में चल रही होती, तो राघव चड्ढा और अन्य राज्यसभा सदस्य उसे नहीं छोड़ते।


 


हजारे ने 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में आम आदमी पार्टी (AAP) के गठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन पार्टी की मुख्यधारा की राजनीति में आने के बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल से दूरी बना ली थी। उनकी यह टिप्पणी इस सप्ताह के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद आई है, जब सांसदों राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने शुक्रवार को AAP से अलग होने की घोषणा की और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चड्ढा ने बताया कि उन्होंने और आम आदमी पार्टी के छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने संसदीय नियमों के अनुसार सदन के अध्यक्ष को पार्टी छोड़ने की सूचना दे दी है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य भाजपा में विलय करेंगे।


 


इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटनाक्रम के जवाब में एक नई रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने गुजरात नगर निगम चुनाव प्रचार से लौटने के बाद देर रात AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने आधे घंटे से अधिक चली बैठक में विभाजन के संभावित प्रभाव और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।