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अन्ना हजारे का 89वां जन्मदिन: समाजसेवा और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी यात्रा

आज, अन्ना हजारे अपना 89वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय सेना के पूर्व सदस्य और समाजसेवी, अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और गांवों में बदलाव लाने का कार्य किया। उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा और उपलब्धियों के बारे में जानें।
 

अन्ना हजारे का जन्मदिन

आज, 15 जून को, अन्ना हजारे, जो भारतीय सेना के पूर्व सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, अपना 89वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जैसे कि लोकपाल बिल को पारित कराने के लिए संघर्ष करना और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

अन्ना हजारे का जन्म 15 जून 1938 को महाराष्ट्र के भिंगारी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके परिवार ने कठिनाइयों का सामना किया। बाद में, अन्ना ने मुंबई का रुख किया और पढ़ाई छोड़कर काम करने लगे। उन्होंने एक फूलवाले की दुकान पर काम किया, जहां उन्हें महीने में केवल 40 रुपए मिलते थे।


सेना में भर्ती

अन्ना हजारे में देश सेवा का गहरा जज्बा था। 1960 के दशक में भारत-चीन युद्ध के बाद, सरकार ने युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। अन्ना ने भी मराठा रेजीमेंट में ड्राइवर के रूप में सेवा शुरू की।


नवंबर 1965 में, अन्ना हजारे खेमकरण सीमा पर तैनात थे, जब पाकिस्तानी हवाई हमले में वहां तैनात सभी लोग मारे गए। लेकिन अन्ना बच गए और इस घटना ने उन्हें लोगों की सेवा करने की प्रेरणा दी।


गांव में बदलाव लाना

सेना से रिटायर होने के बाद, अन्ना ने अपने पैतृक गांव रालेगांव सिद्धि में निवास करना शुरू किया। यह गांव अत्यंत गरीब था, जहां पानी और बिजली की कमी थी। अन्ना ने गांव में बदलाव लाने का बीड़ा उठाया और बारिश के पानी को संचित करने के लिए गड्ढे खोदने लगे।


शुरुआत में लोगों ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन अन्ना की मेहनत ने गांववालों को प्रेरित किया। उन्होंने मिलकर पानी की बचत और वृक्षारोपण जैसे कार्य किए। इसके परिणामस्वरूप, गांव में सौर ऊर्जा और गोबर गैस से बिजली की आपूर्ति शुरू हुई, जिससे रालेगांव का चेहरा बदल गया।


भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई

इस गांव के विकास ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया, जिसके लिए अन्ना को पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। लेकिन उनकी समाजसेवा यहीं समाप्त नहीं हुई। अन्ना ने गांवों में गरीबी के लिए भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया और इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया। यह 90 के दशक के प्रारंभ की बात है।


अन्ना हजारे को सूचना के अधिकार कानून के लिए भी जाना जाता है। 1997 में, उन्होंने इस कानून के समर्थन में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। 2003 में, महाराष्ट्र की सरकार ने इस कानून को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया, जिसके बाद संसद ने इसे पारित किया। यह कानून आज भी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।


दिल्ली की राजनीति में प्रभाव

अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल के लिए अडिग रहे, जिससे सरकारी भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके। जंतर-मंतर से शुरू हुए इस आंदोलन में अन्ना और अरविंद केजरीवाल को प्रारंभ में ज्यादा महत्व नहीं मिला। लेकिन अन्ना के गांधीवादी तरीकों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और पूरा आंदोलन उनके नाम हो गया। उन्होंने युवाओं और आम लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा किया।