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अनोखी शादी की परंपरा: दूल्हा-दुल्हन की अग्निपरीक्षा

भारत में गंधेल गोत्र की शादी में एक अनोखी परंपरा है, जहां दूल्हा-दुल्हन को दहकते अंगारों पर चलाया जाता है। इस रस्म को अग्निपरीक्षा कहा जाता है, जिसमें दुल्हन की पवित्रता का परीक्षण किया जाता है। यदि वह अपवित्र है, तो उसे जलने का खतरा होता है। इस परंपरा के दौरान परिवार के सदस्य अन्न और पानी का सेवन नहीं करते। जानें इस अनोखी परंपरा के पीछे के तर्क और इसकी सामाजिक मान्यता के बारे में।
 

गंधेल गोत्र की अनोखी परंपरा

Raigarh News: भारत में कई प्रकार की अनोखी शादियों की परंपराएं देखने को मिलती हैं। इनमें से कुछ परंपराएं इतनी विचित्र होती हैं कि उन पर विश्वास करना भी कठिन हो जाता है। ऐसी ही एक परंपरा गंधेल गोत्र में देखने को मिलती है, जहां शादी के बाद गृहप्रवेश से पहले दूल्हा-दुल्हन को दहकते अंगारों पर चलाया जाता है। इसके पीछे कई तर्क दिए जाते हैं, जिनमें से एक तर्क यह है कि यदि दुल्हन ने मायके में कोई नुकसान किया है, तो वह अंगारों पर जल जाएगी।


‘…तो जल जाएगी बहू’, गृह प्रवेश से पहले सासू मां ने क्यों ली दुल्हन की अग्निपरीक्षा? दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलवाया


बिलासपुर गांव के जयप्रकाश राठिया की शादी बाड़ादरहा गांव की पुष्पा राठिया के साथ हुई। 27 अप्रैल को जब दुल्हन विदा होकर ससुराल पहुंची, तो उसका स्वागत एक अनोखे तरीके से किया गया। दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया ने बताया कि बहू के घर आने तक परिवार का कोई भी सदस्य अन्न का एक दाना या पानी की एक बूंद भी नहीं ग्रहण करता। यह कड़ा निर्जला व्रत बहू के गृह प्रवेश के बाद ही समाप्त होता है।


बैगा का नृत्य और आग की सेज


परंपरा के अनुसार, घर के मंडप को चारों ओर से कपड़ों से ढक दिया जाता है। इसके बाद गांव के बैगा (पुजारी) द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जब बैगा पर देवता सवार होते हैं, तब चूल्हे से दहकते हुए लाल अंगार लाकर मंडप के बीच में बिछा दिए जाते हैं। पहले बैगा खुद उन अंगारों पर नाचते हैं और फिर दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे का हाथ थामकर उन अंगारों के ऊपर से सात फेरे लेते हैं।


‘कुछ गलत हुआ तो जल जाएगी बहू’


ग्रामीणों और बुजुर्गों का मानना है कि यह रस्म एक प्रकार की अग्निपरीक्षा है। समाज में यह धारणा है कि यदि बहू अपने मायके से कुछ नुकसान करके आई होगी या अपवित्र होगी, तो अंगार उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि वह पवित्र है, तो उसे आंच तक नहीं आएगी। परिवार का मानना है कि अंगारों पर चलने से दूल्हा-दुल्हन को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।


बलि प्रथा और मंदिर की अनिवार्य पूजा


इस रस्म के दौरान दो बकरों की बलि देने की परंपरा भी है। साथ ही, बारात के प्रस्थान और आगमन के समय गांव के प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करना अनिवार्य माना जाता है। जयप्रकाश और पुष्पा ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए महादेव का आशीर्वाद लिया और फिर अंगारों पर चलकर अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। हैरानी की बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दूल्हा-दुल्हन को कोई शारीरिक चोट नहीं आई। फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस अग्निपरीक्षा वाली शादी की चर्चा जोरों पर है।