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अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा एलपीजी को दिया नया नाम

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा की एलपीजी नीति पर तीखी आलोचना की, इसे 'लपाता गैस' करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य जनता को गुमराह करना है। इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र में आयोजित इफ्तार पार्टी में भाग लिया, जहां उन्होंने एकता का संदेश दिया। अबू आज़मी ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर भी अपनी राय रखी, यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य केवल राजनीति करना है। इस लेख में जानें यादव की टिप्पणियों और इफ्तार पार्टी की महत्वपूर्ण बातें।
 

अखिलेश यादव की भाजपा पर तीखी टिप्पणी

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने शनिवार को एलपीजी के मुद्दे पर भाजपा की केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे 'लपाता गैस' करार दिया। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर भारत की कूटनीति पर बात करते हुए यादव ने कहा कि भाजपा का असली मकसद जनता को गुमराह करना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने एलपीजी को नया नाम दिया है: लपाता गैस। यदि भाजपा ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने से पहले समझौता कराने में सफल होती, तो न तो ईरान को इतना नुकसान होता और न ही इतनी जानें जातीं। ये लोग हर मौके को बर्बाद कर देते हैं और 'मेक इन इंडिया' का सपना दिखाते हैं, जबकि असल में वे केवल जनता को भ्रमित करना चाहते हैं।


इफ्तार पार्टी में शामिल हुए अखिलेश यादव

इस दिन पहले, अखिलेश यादव ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के साथ महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आज़मी द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में भाग लिया। इस अवसर पर नेताओं ने एक साथ भोजन किया और 'हम सब एक हैं' के पोस्टर पकड़े। मीडिया से बातचीत करते हुए यादव ने इसे भारत की विविधता का प्रतीक बताया। उन्होंने अबू आज़मी का धन्यवाद करते हुए कहा कि यही भारत का असली मूल्य है। हम एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं और खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं। हाल ही में होली मनाई गई थी, और अब ईद आ रही है, जिसे हम मिठाइयों के साथ मनाएंगे। यही हमारे देश की पहचान है।


धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर अबू आज़मी की टिप्पणी

‘दावत-ए-इफ्तार’ में महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि धर्मांतरण विरोधी विधेयक का उद्देश्य केवल धर्म के नाम पर राजनीति करना है। ऐसे विधेयक लाकर वे जनता में भ्रम फैलाना चाहते हैं। उनका मानना है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित कानूनी ढांचा इस राष्ट्र के लिए सबसे मजबूत आधार है, जो हर धर्म के लिए समानता सुनिश्चित करता है। इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करके और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देकर, ये लोग केवल घृणा फैलाना चाहते हैं।