अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल चुनाव में धांधली के आरोप लगाए, उच्चतम न्यायालय से कार्रवाई की मांग
पश्चिम बंगाल चुनाव में धांधली के आरोप
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में व्यापक धांधली के आरोप लगाते हुए उच्चतम न्यायालय से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने मांग की कि राज्य में हुई मतगणना के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए।
एक संवाददाता सम्मेलन में यादव ने कहा कि भाजपा के नेता, सरकारी अधिकारी, व्यापारी और ठेकेदार मिलकर एक 'बहु-स्तरीय चुनावी माफिया' का गठन कर चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी अपनी रणनीति के साथ सक्रिय होंगे।
भाजपा पर गंभीर आरोप
यादव ने आरोप लगाया कि बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर धांधली की गई और कई वोट काटे गए। उन्होंने कहा, "हमारी मांग है कि उच्चतम न्यायालय तुरंत इस मामले का संज्ञान ले और बंगाल की मतगणना के सीसीटीवी फुटेज को सभी के सामने लाया जाए।"
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालतों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण संभव है, तो मतगणना की प्रक्रिया का क्यों नहीं।
चुनाव प्रचार पर टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार न करने के सवाल पर यादव ने कहा, "हमारे पास दूसरे राज्यों में प्रचार करने के लिए संसाधन नहीं थे। हम उत्तर प्रदेश में ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस द्वारा अभिनेता विजय की पार्टी को समर्थन देने पर यादव ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कहा, "हम क्यों बताएं कि किस पर भरोसा करना है।"
उत्तर प्रदेश में चुनावी रणनीति
यादव ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की 143 विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के तहत 20,000 से अधिक वोट काटे गए, जिनमें से 91 सीटें भाजपा ने जीतीं। उन्होंने कहा, "भाजपा के लोग घबरा गए थे जब उनका वोट कटा।"
उन्होंने यह भी कहा कि 'बहु-स्तरीय चुनावी माफिया' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नई योजना बनाएंगे।
भविष्य की योजनाएं
यादव ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा की 'ऐतिहासिक जीत' का विश्वास जताते हुए कहा, "2027 में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) ऐतिहासिक जीत हासिल करेगा।"
उन्होंने 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (इंडिया) से जुड़ाव के बारे में कहा कि सपा इस गठबंधन के साथ अपने संबंध बनाए रखेगी, लेकिन इस बार 'पीडीए' भाजपा को सत्ता से बाहर करेगा।