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अखलाक लिंचिंग केस: असली अपराधियों की तलाश में बाधाएं और न्याय की उम्मीदें

ग्रेटर नोएडा में हुए अखलाक लिंचिंग केस में असली अपराधियों की तलाश में कई बाधाएं सामने आ रही हैं। इस मामले में राजनीतिक मोड़ और न्याय की उम्मीदें भी जटिलता बढ़ा रही हैं। वरिष्ठ वकील डॉ. ए पी सिंह के अनुसार, जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए लोग असली अपराधी नहीं हैं। जानें इस संवेदनशील मामले की पूरी कहानी और क्या न्याय मिल पाएगा?
 

अखलाक लिंचिंग केस की जटिलताएं


उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के तहत किसी भी मामले में गड़बड़ी करना कठिन है, फिर भी ग्रेटर नोएडा में हुए अखलाक लिंचिंग केस में असली अपराधियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यह घटना 28 सितंबर 2015 को रात के समय हुई थी, जिसमें एक भीड़ शामिल थी।


हाल ही में, अदालत ने बचाव पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मुकदमा आगे बढ़ेगा। यह जानकारी वरिष्ठ वकील डॉ. ए पी सिंह ने दी, जिन्होंने कहा कि इस मामले में असली अपराधियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है।


उन्होंने यह भी बताया कि जिस स्थान पर यह हत्या हुई, वहां सीसीटीवी कैमरे या अन्य तकनीकी साधन नहीं थे, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मोहम्मद अखलाक की हत्या में कौन लोग शामिल थे। इस प्रकार, असली अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसी के लिए एक कठिन कार्य बन गया है।


राजनीतिक मोड़ और आरोप

ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में हुई इस घटना में मोहम्मद अखलाक को भीड़ ने घेरकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक और उनके परिवार ने चोरी किए गए बछड़े का मांस खाया था।


इस मामले में जब भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय नेता के बेटे का नाम सामने आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना मुश्किल हो सकता है।


हाल ही में, यूपी सरकार ने अदालत में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने का आवेदन दायर किया, लेकिन अदालत ने इसे ठुकराते हुए मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया।


न्याय की उम्मीदें और जटिलताएं

डॉ. ए पी सिंह ने कहा कि भारत का कानून कहता है कि एक बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन 18-19 लोगों को पिछले 10 वर्षों से आरोपी बनाया गया है, वे असली अपराधी नहीं लगते।


इस मामले की जटिलता को देखते हुए, उन्होंने कहा कि अदालतें मीडिया ट्रायल पर नहीं चलतीं और सबूतों के आधार पर ही निर्णय लिया जाता है।


इस प्रकार, मोहम्मद अखलाक लिंचिंग केस एक संवेदनशील और जटिल मामला है, जिसकी जांच में जल्दबाजी न्याय के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।