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अखबार में खाना पैक करने पर FSSAI की चेतावनी: जानें स्वास्थ्य पर प्रभाव

FSSAI ने हाल ही में अखबार में खाना पैक करने पर रोक लगाई है, यह चेतावनी देते हुए कि इससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अखबार की स्याही में जहरीले रसायन होते हैं, जो खाने में मिलकर कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, बच्चे और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग इस खतरे से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या जानकारी है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।
 

अखबार में खाना पैक करने का खतरा

बाजार में समोसे से लेकर टिफिन में पराठे पैक करने के लिए अखबार का उपयोग आम बात है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर ध्यान कम ही दिया जाता है। हाल ही में, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अखबार में खाना परोसने या लपेटने पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। दरअसल, अखबार की प्रिंटिंग में उपयोग होने वाली स्याही में जहरीले रसायन होते हैं, जैसे कि लेड। यदि आप भी कभी खाने को लपेटने के लिए अखबार का उपयोग करते हैं, तो आपको इसके स्वास्थ्य पर प्रभावों के बारे में जानना चाहिए।


खाने में रसायनों का मिश्रण

FSSAI का कहना है कि जब गर्म या तैलीय खाना अखबार के संपर्क में आता है, तो इसकी स्याही में मौजूद रसायन सीधे आपके खाने में मिल जाते हैं, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


पहले भी चेतावनी दी गई थी

यह पहली बार नहीं है जब FSSAI ने अखबार में खाना रखने के नुकसान के बारे में चेतावनी दी है। 2019 में भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की गई थी ताकि खाद्य पदार्थ दूषित न हों। खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम के तहत, खाद्य पदार्थों के भंडारण और पैकेजिंग के लिए अखबार या इसी तरह की सामग्री का उपयोग करना सख्त मना है।


कैंसर का खतरा

हालांकि चिकित्सा विज्ञान में काफी प्रगति हुई है, कैंसर अब भी एक गंभीर बीमारी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, धूम्रपान के अलावा, डाई और पेंट जैसे रसायनों से भी कैंसर का खतरा होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मूत्राशय कैंसर के विकास का एक प्रमुख कारण एरोमैटिक एमाइन और 4,4′-मेथिलीनबिस के संपर्क में आना है। ये रसायन रंगाई और रबर उद्योगों के उत्पादों, हेयर डाई, पेंट, फफूंदनाशक, सिगरेट के धुएं, प्लास्टिक, धातुओं और मोटर वाहन के धुएं में पाए जाते हैं।


पाचन पर प्रभाव

FSSAI की एडवाइजरी में कहा गया है कि छोटे होटलों, विक्रेताओं और घरों में सोखने वाले कागज के स्थान पर समाचार पत्रों का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे भारतीय धीरे-धीरे जहर का शिकार हो रहे हैं। रासायनिक संदूषकों के अलावा, अखबारों में रोगजनक सूक्ष्मजीव भी हो सकते हैं, जो पाचन को नुकसान पहुंचा सकते हैं और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं।


स्वास्थ्य पर अन्य प्रभाव

रसायनों के संपर्क में आए खाने से मस्तिष्क और किडनी को भी नुकसान हो सकता है। जब शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है और किडनी इन्हें फिल्टर नहीं कर पाती, तो ये क्रिस्टल के रूप में जमा हो जाते हैं, जिससे किडनी पर अधिक दबाव बढ़ता है। इसे चिकित्सा भाषा में नेफ्रोटॉक्सिसिटी कहा जाता है।


जोखिम में लोग

FSSAI की 2016 की रिपोर्ट में बताया गया था कि बुजुर्ग, किशोर, बच्चे और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग यदि ऐसे रसायनों वाले पेपर में पैक किए गए खाने के संपर्क में आते हैं, तो उनमें कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का अधिक जोखिम होता है।