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UPI भुगतान पर संभावित शुल्क: क्या होगा आम उपभोक्ताओं पर असर?

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की योजना से आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा? सरकार का कहना है कि छोटे लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन बड़े लेनदेन पर MDR लागू हो सकता है। जानें इस बदलाव के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
 

UPI भुगतान में संभावित बदलाव

आजकल, यूपीआई के माध्यम से भुगतान करना हर भारतीय की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। लेकिन हाल ही में आई खबरों के अनुसार, सरकार इस पर शुल्क लगाने की योजना बना रही है। एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि इससे लोग यूपीआई के जरिए भुगतान करने में कमी ला सकते हैं। भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख साधन यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत परिवर्तन की संभावना है। केंद्र सरकार ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का विधेयक पेश किया है, जिससे UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो इसका दायरा सीमित रहेगा और आम उपभोक्ताओं के छोटे दैनिक लेनदेन इससे प्रभावित नहीं होंगे।


MDR की संभावित दरें

सरकारी सूत्रों के अनुसार, विचार किया जा रहा है कि ₹2,000 से अधिक के बिजनेस (Person-to-Merchant) UPI भुगतान पर 0.25% से 0.40% तक MDR लगाया जा सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर 0.05% से 0.07% के बीच भी हो सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person) को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसका मतलब है कि व्यक्तिगत लेनदेन, जैसे दोस्तों या रिश्तेदारों के बीच, पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।


सरकार की योजना

सरकार छोटे व्यापारियों को राहत देने की योजना बना रही है। चर्चा है कि जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ तक है, उन्हें MDR से पूरी छूट दी जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि शुल्क केवल बड़े व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों पर लागू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो अधिकांश छोटे दुकानदार इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे।


डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

जनवरी 2020 में, सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR समाप्त कर दिया था ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिल सके। इसके बाद, सरकार ने ₹2,000 से कम के UPI भुगतान पर 0.15% की प्रोत्साहन राशि दी। हालांकि, भुगतान उद्योग ने यह कहा है कि यह सहायता पर्याप्त नहीं है और डिजिटल भुगतान नेटवर्क के संचालन की लागत बढ़ रही है।


MDR बहाली की मांग

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने भी MDR बहाल करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि वर्तमान सरकारी प्रोत्साहन उद्योग की वास्तविक लागत का केवल 11% और संभावित MDR आय का 14% ही पूरा कर पाता है। वित्त संबंधी संसदीय समिति ने भी कहा था कि MDR की अनुपस्थिति से UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार संतुलित रास्ता अपनाने की कोशिश कर रही है। फिनटेक कंपनी ज़ेटा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मेहुल मिस्त्री का कहना है कि प्रस्तावित ढांचा ऐसा हो सकता है जिसमें उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान लगभग निशुल्क रहे, जबकि बड़े कारोबारियों से मामूली शुल्क लेकर बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए स्थायी आय सुनिश्चित की जा सके।


UPI की सफलता

UPI की अभूतपूर्व सफलता भी इस बहस का एक बड़ा कारण है। जुलाई 2026 में UPI के जरिए 23.66 अरब से अधिक लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2017 में UPI पर केवल दो करोड़ लेनदेन होते थे, जबकि वित्त वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 241.62 अरब से अधिक हो गई है।


भविष्य की संभावनाएं

हालांकि, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि MDR कब और किस स्वरूप में लागू होगा। लेकिन संसद में लाया गया संशोधन विधेयक यह संकेत देता है कि सरकार डिजिटल भुगतान को पूरी तरह मुफ्त रखने और इसके टिकाऊ वित्तीय मॉडल के बीच संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो आम उपभोक्ता और छोटे व्यापारी लगभग अप्रभावित रहेंगे।