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PRAGATI पहल ने 50 समीक्षाओं का मील का पत्थर पार किया

भारत सरकार की PRAGATI पहल ने 50 समीक्षाओं का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। इस पहल का उद्देश्य लंबित परियोजनाओं और नागरिक शिकायतों को समयबद्ध तरीके से हल करना है। कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने मीडिया को बताया कि अब तक 3,300 से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी है। इस प्रणाली ने 73 प्रतिशत समाधान दर हासिल की है। PRAGATI ने भारत की शासन संस्कृति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है, जिससे परियोजनाएँ समय पर पूरी हो रही हैं और जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो रहा है।
 

PRAGATI पहल का महत्व

भारत सरकार की प्रमुख PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) पहल ने 50 समीक्षाओं का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया है। इस अवसर पर कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने मीडिया को लगभग दो घंटे तक परियोजनाओं, योजनाओं और शिकायत निवारण से संबंधित सभी पहलुओं पर जानकारी दी और सवालों के जवाब दिए।


PRAGATI की स्थापना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च 2015 को PRAGATI मंच की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य लंबित सार्वजनिक परियोजनाओं, योजनाओं और नागरिक शिकायतों को तकनीकी और समयबद्ध तरीके से हल करना है। इस मंच ने केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय की पुरानी समस्याओं को दूर किया है।


परियोजनाओं की समीक्षा

कैबिनेट सचिव सोमनाथन ने बताया कि PRAGATI/PMG पोर्टल पर अब तक 3,300 से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी है, जिनकी कुल लागत 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा, 61 प्रमुख सरकारी योजनाओं और 36 सेक्टरों से संबंधित नागरिक शिकायतों की निगरानी भी इसी मंच के माध्यम से की गई है।


समस्याओं का समाधान

अब तक 7,735 मुद्दे उठाए गए हैं, जिनमें से 7,156 का समाधान किया गया है, जिससे समाधान दर लगभग 73 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री द्वारा सीधे समीक्षा की गई 382 परियोजनाओं में 3,187 मुद्दे सामने आए, जिनमें से 2,958 का समाधान हुआ।


सेक्टर-वार समीक्षा

प्रधानमंत्री द्वारा समीक्षा की गई परियोजनाओं में सड़क और राजमार्ग (114 परियोजनाएँ), रेलवे (109) और बिजली (54) क्षेत्र की सबसे अधिक हिस्सेदारी रही। इसके अलावा, पेट्रोलियम, कोयला, आवास एवं शहरी कार्य, जल शक्ति, स्वास्थ्य और विदेश मामलों से जुड़ी परियोजनाएँ भी शामिल हैं।


PRAGATI के प्रभाव

PRAGATI के प्रभाव को दर्शाने वाले प्रमुख उदाहरणों में जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बोगीबील रेल-सड़क पुल शामिल हैं, जिन्हें PRAGATI के हस्तक्षेप के बाद समयबद्ध रूप से पूरा किया गया।


कैपेक्स में वृद्धि

कैपेक्स के मोर्चे पर भी तस्वीर बदली है। 2014-15 में पूंजीगत व्यय 1.97 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।


रेल मंत्रालय की उपलब्धियाँ

रेल मंत्रालय में पिछले दशक में 370 प्रतिशत कैपेक्स वृद्धि, 98 प्रतिशत ब्रॉडगेज नेटवर्क का विद्युतीकरण और 31,000 किमी नई पटरियाँ शामिल हैं।


सड़क और बिजली क्षेत्र में प्रगति

सड़क क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 60 प्रतिशत बढ़ी है और बिजली क्षेत्र में 500 गीगावाट से अधिक स्थापित क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा में 300 प्रतिशत वृद्धि हुई है।


PRAGATI की भूमिका

PRAGATI केवल एक समीक्षा मंच नहीं है, बल्कि यह भारत की शासन संस्कृति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला तत्व है। यह प्रणाली परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करती है और जनता का विश्वास पुनः स्थापित करती है।


प्रधानमंत्री की भूमिका

इस प्रणाली के केंद्र में प्रधानमंत्री स्वयं हैं, जो नियमित रूप से राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय सचिवों से सवाल करते हैं। यह जवाबदेही को सुनिश्चित करता है।


PRAGATI का भविष्य

PRAGATI की सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ अवधारणा इसे और भी प्रभावी बनाती है। यह न केवल परियोजनाओं को सफल बनाता है, बल्कि भारत के विकास के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करता है।