सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी पर ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोपों पर गंभीरता दिखाई
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जब अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों को गंभीरता से लिया। ईडी ने कहा कि बनर्जी ने उनकी जांच में बाधा डाली। न्यायालय ने इस मामले में राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इस मामले ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव को फिर से उजागर किया है। सभी की नजरें अब अगली सुनवाई पर हैं, जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा होगी।
Jan 15, 2026, 16:43 IST
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को आज एक महत्वपूर्ण झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोप को ‘‘बेहद गंभीर’’ करार दिया। ईडी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनकी जांच में ‘‘बाधा उत्पन्न की’’। इसके साथ ही, न्यायालय ने यह भी विचार करने पर सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी पर रोक
न्यायालय ने उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है, जिन्होंने आठ जनवरी को ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। अदालत ने राज्य पुलिस को छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने मुख्यमंत्री बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार और अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों को ईडी की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है।
कानून के शासन का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता
पीठ ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि देश में कानून के शासन का पालन सुनिश्चित करने और प्रत्येक अंग को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति देने के लिए इस मुद्दे की समीक्षा करना आवश्यक है ताकि अपराधियों को किसी विशेष राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की छत्रछाया में संरक्षण न मिल सके।’’
राजनीतिक दलों के चुनावी काम में हस्तक्षेप का मुद्दा
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल के चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने की शक्ति केंद्रीय एजेंसियों के पास नहीं होनी चाहिए। हालांकि, यदि केंद्रीय एजेंसियां गंभीर अपराध की जांच कर रही हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या दलगत गतिविधियों के बहाने उन्हें अपने कर्तव्यों से रोका जा सकता है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में हंगामा
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में ईडी की छापेमारी से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान हुए हंगामे पर चिंता व्यक्त की। उच्च न्यायालय ने राजनीतिक परामर्श देने वाली कंपनी आई-पैक से जुड़े स्थानों पर ईडी की छापेमारी को ‘‘अनियंत्रित अराजकता’’ का हवाला देते हुए 14 जनवरी तक स्थगित कर दिया था।
ईडी के आरोप और मुख्यमंत्री का बचाव
ईडी ने आरोप लगाया कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण दस्तावेज हटवाए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जब भी वैधानिक अधिकारी अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं, हस्तक्षेप किया जाता है।
भाजपा का प्रतिक्रिया
भाजपा ने कहा है कि अदालत का आदेश तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने उन सभी FIR पर रोक लगा दी है जो ममता बनर्जी की सरकार ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की थीं।
केंद्र और राज्य के बीच टकराव
इस मामले ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। सभी की नजरें अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा होगी।