×

सुधीर मुनगंटीवार ने सावरकर को भारत रत्न देने में देरी पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने सावरकर को भारत रत्न देने में हो रही देरी पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करना चाहिए। मुनगंटीवार ने मार्च में पेश किए गए प्रस्ताव की स्थिति पर चिंता जताई और सरकार से स्पष्टता की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई थी, लेकिन सरकार इस पर काम कर रही है।
 

सावरकर को भारत रत्न देने की मांग

महाराष्ट्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने के प्रस्ताव में हो रही देरी पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। शुक्रवार को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग वाले प्रस्ताव को पारित करने में आखिर इतनी देरी क्यों की जा रही है।


सदन में अपनी बात रखते हुए पूर्व मंत्री मुनगंटीवार ने गहरे दुख के साथ कहा कि सत्ता में आने के बाद किसी भी राजनीतिक दल को अपनी मूल विचारधारा से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे पर सरकार का रुख बदल गया है, तो उसे सबके सामने खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सावरकर की विचारधारा के लिए पूरा जीवन समर्पित करने वाले एक कार्यकर्ता के रूप में उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनकी अपनी ही सरकार इस फाइल को दबाकर बैठी है और वह इस मुद्दे को दोबारा कभी नहीं उठाएंगे।


गौरतलब है कि इसी साल मार्च में मुनगंटीवार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें वीर सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने 5 मार्च को आश्वासन दिया था कि प्रस्ताव पर जल्द विचार किया जाएगा। इसके बावजूद, पिछले बजट सत्र या मौजूदा मानसून सत्र की कार्यसूची में इसे शामिल नहीं किया गया।


भाजपा विधायक ने देरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के असहनीय अत्याचारों का सामना किया था, ऐसे में कम से कम हमें तो अनजाने में भी अपनी ओर से देरी करके उन्हें और तकलीफ नहीं पहुंचानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी फाइल को इतने लंबे समय तक रोका जा सकता है, जबकि 5 मार्च से 10 जुलाई के बीच सदन के दो पूरे सत्र बीत चुके हैं। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल से इस विषय पर सरकार का रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया।


मुनगंटीवार के इन सवालों पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन में स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव इसलिए सदन के सामने नहीं रखा जा सका क्योंकि इस पर कार्य मंत्रणा समिति में चर्चा नहीं हुई थी। अध्यक्ष ने कहा कि सभी दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किए बिना सीधे ऐसा प्रस्ताव लाना उन्हें उचित नहीं लगा। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय पर काम कर रही है और अगले सत्र के दौरान कार्य मंत्रणा समिति में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।