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संजय राउत ने इमरजेंसी पर उठाए सवाल, बीजेपी और शिंदे पर साधा निशाना

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गुरुवार को एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और बीजेपी पर तीखा कटाक्ष किया। NCERT द्वारा 9वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में 1975 की इमरजेंसी को शामिल करने के बाद राउत ने कहा कि देश पिछले 12 वर्षों से इमरजेंसी जैसे हालात का सामना कर रहा है। उन्होंने इमरजेंसी का बचाव करते हुए संविधान में इसके प्रावधान का उल्लेख किया। राजस्थान कांग्रेस के विधायक सचिन पायलट ने भी इस कदम की आलोचना की और बीजेपी पर इतिहास को बदलने का आरोप लगाया। इस लेख में राउत के बयान और राजनीतिक परिदृश्य पर उनके विचारों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
 

संजय राउत का बयान

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने गुरुवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और बीजेपी पर कटाक्ष किया। यह कटाक्ष तब किया गया जब NCERT ने 9वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में 1975 की इमरजेंसी से संबंधित एक विषय जोड़ा। राउत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किसी भी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा। 'पार्टी तोड़ने' का यह बयान तब आया जब UBT के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने शिवसेना में वापसी की। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने यह भी कहा कि देश पिछले 12 वर्षों से इमरजेंसी जैसे हालात का सामना कर रहा है। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि संविधान में इसकी व्यवस्था है।


इमरजेंसी का संदर्भ

राउत ने कहा, "इस देश में पिछले 12 सालों से इमरजेंसी जैसे हालात हैं। इंदिरा गांधी ने किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा और न ही संविधान को समाप्त किया। इमरजेंसी केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं है, बल्कि संविधान में इसका प्रावधान भी है। संविधान में अराजकता की स्थिति में इमरजेंसी लगाने का प्रावधान है। इसका मतलब यह नहीं है कि संविधान का सम्मान नहीं किया जाना चाहिए। मैं यह पूछना चाहता हूं कि नोटबंदी क्यों लागू की गई? COVID-19 महामारी के दौरान कड़े प्रतिबंध और इमरजेंसी जैसे उपाय क्यों अपनाए गए? बालासाहेब ठाकरे ने इमरजेंसी का समर्थन किया था। यदि कोई कहता है कि सरकार के आदेशों का पालन न करें या सेना से पीएम मोदी के खिलाफ बगावत करने को कहे, तो आप क्या करेंगे? इस बीच, NCERT ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है और इसे "बड़ी चुनौतियों में से एक" के रूप में प्रस्तुत किया है, क्योंकि उस समय अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे।


नई पाठ्यपुस्तक में इमरजेंसी

यह विषय नई सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' में शामिल किया गया है, जिसमें भारतीय लोकतंत्र की विशेषताओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई है।


सचिन पायलट की प्रतिक्रिया

राजस्थान कांग्रेस के विधायक सचिन पायलट ने भी इस कदम की आलोचना की और इसे बीजेपी सरकार द्वारा इतिहास को बदलने की कोशिश बताया। उन्होंने केंद्र पर न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। पायलट ने कहा, "जब भी बीजेपी सरकार किसी राज्य या केंद्र में होती है, तो वे इतिहास को अपनी इच्छानुसार प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। आज़ाद भारत के इतिहास में लोकतंत्र के सामने ऐसी चुनौती पहले कभी नहीं आई। जिस तरह से सोशल मीडिया, मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग का उपयोग करके आवाज़ों को दबाया जा रहा है, यह पहली बार है जब कोई सरकार ऐसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।