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शिवसेना में बगावत: नीलेश राणे का संजय राउत पर तीखा हमला

शिवसेना विधायक नीलेश नारायण राणे ने सोमवार को संजय राउत पर तीखा हमला करते हुए बागी विधायकों के खिलाफ उनके आरोपों को खारिज किया। राणे ने राउत को सबूत पेश करने की चुनौती दी और कहा कि उनकी बातें महत्व नहीं रखतीं। इस बीच, एकनाथ शिंदे ने छह सांसदों के उनके साथ शामिल होने की पुष्टि की। यह घटनाक्रम शिवसेना (UBT) के लिए एक और झटका है, जो पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रही है। जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे की पूरी कहानी।
 

नीलेश राणे का राउत पर हमला

शिवसेना विधायक नीलेश नारायण राणे ने सोमवार को शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राउत के बागी विधायकों पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के निर्णय का समर्थन किया। मीडिया से बातचीत में, राणे ने राउत के उन दावों पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाला बदलने में पैसे का लेन-देन हुआ था, और उन्हें सबूत पेश करने की चुनौती दी। राणे ने कहा कि संजय राउत की बातों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। क्या उनके पास कोई ठोस सबूत है? वे किस आधार पर यह कह रहे हैं कि पैसे का लेन-देन हुआ? क्या वे हवाला में शामिल थे?... मैं उनके सवालों का जवाब क्यों दूं? वे 'गटर-छाप' किस्म के व्यक्ति हैं।


संजय राउत के आरोप

यह बयान तब आया जब राउत ने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर सहित कई बागी सांसदों पर शिवसेना की विचारधारा से गद्दारी का आरोप लगाया और कहा कि दल बदलने के पीछे पैसों का लालच था। राउत ने यह भी कहा कि शिवसेना को तोड़ना "महाराष्ट्र को बांटने" के समान है और आरोप लगाया कि निंबालकर को पाला बदलने के लिए पैसे मिले थे। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, शिवसेना (UBT) के छह सांसद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए।


एकनाथ शिंदे का बयान

मीडिया से बातचीत करते हुए, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज छह सांसद हमारे साथ शामिल हुए हैं। इनमें संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापूराव पाटिल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास तीन संजय हैं, और एक और संजय राठौड़ (MLA) भी हमारे साथ हैं। जब हमारे पास इतने संजय हैं, तो किसी और संजय की चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है, और आप जानते हैं कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूं।  यह राजनीतिक घटनाक्रम शिवसेना (UBT) के लिए एक और झटका है, जो पहले से ही आंतरिक कलह और दल-बदल की अटकलों से जूझ रही है। यह बगावत तब और बढ़ गई जब छह सांसद हाल ही में हुई संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे गुट के अंदर फूट पड़ने की आशंका और बढ़ गई।