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शशि थरूर की कूटनीतिक दृष्टि: भारत की चुप्पी या जिम्मेदार नीति?

शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति पर अपनी बेबाक राय रखी है, जिसमें उन्होंने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के संदर्भ में सरकार की चुप्पी को जिम्मेदार कूटनीति बताया है। उनके विचार कांग्रेस के नेतृत्व से भिन्न हैं, जो सरकार की आलोचना कर रही है। थरूर का मानना है कि संयम बरतना और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। जानें उनके तर्क और कूटनीतिक दृष्टिकोण के बारे में।
 

शशि थरूर का बेबाक बयान

भारतीय राजनीति के प्रमुख चेहरे और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने एक बार फिर अपने स्पष्ट विचारों से सबको चौंका दिया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे गंभीर संघर्ष पर, जहाँ कांग्रेस नेतृत्व केंद्र सरकार की 'चुप्पी' को नैतिक हार मानता है, वहीं थरूर इसे भारत की "जिम्मेदार कूटनीति" के रूप में देखते हैं.


राष्ट्रीय हितों की प्राथमिकता

अपने लेख में 'इंडियन एक्सप्रेस' में थरूर ने कहा कि विदेश नीति केवल अकादमिक सेमिनार जैसी नहीं होती। उन्होंने स्वीकार किया कि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर सकती हैं, लेकिन भारत का संयम किसी डर का परिणाम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक समझदारी का संकेत है। थरूर ने लिखा, "इस संदर्भ में, चुप रहना कायरता नहीं है। यह हमारे राष्ट्रीय हितों और क्षेत्र की वास्तविकताओं के बीच संतुलन को समझने का नतीजा है।"


कांग्रेस का विरोध

थरूर का यह दृष्टिकोण उनकी पार्टी के विचारों से भिन्न है। पिछले महीने जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिसमें कई नागरिक और अयातुल्ला अली खामेनेई जैसे प्रमुख नेता मारे गए, तब कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की। कांग्रेस का कहना था कि सरकार ने इस युद्ध की निंदा क्यों नहीं की।


थरूर की आलोचना

थरूर ने खामेनेई की हत्या पर भारत की प्रतिक्रिया में देरी को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को चुप रहने के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, "भारत की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि वह इस युद्ध का समर्थन करता है।"


उदारवादियों की आलोचना

थरूर ने उन उदारवादियों पर भी निशाना साधा, जो सरकार पर नैतिक कायरता का आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने ही लोगों को नुकसान पहुँचाते हैं।


भारत की कूटनीतिक चुनौतियाँ

एक अनुभवी राजनयिक के रूप में, थरूर ने चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ संबंधों में स्थिरता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा संबंधों और तकनीकी साझेदारियों के लिए अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों की आवश्यकता है।


आर्थिक संबंधों का महत्व

थरूर ने भारत के खाड़ी देशों के साथ गहरे आर्थिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव से लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार और 90 लाख भारतीयों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।


संयम की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि संयम बरतने से भारत अपने हितों की रक्षा कर सकता है और सभी पक्षों के साथ बातचीत के रास्ते भी खुले रखता है।


थरूर का समर्थन

यह पहली बार नहीं है जब थरूर ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के रुख का समर्थन किया है। इससे पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद-विरोधी एजेंडे की सराहना की थी।


कांग्रेस में असंतोष

हालांकि, उनकी हालिया टिप्पणियों से उनकी पार्टी के सहयोगियों के नाराज़ होने की संभावना है, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में और दरार आ सकती है।