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राहुल गांधी का ट्रांसजेंडर विधेयक पर कड़ा विरोध

राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों पर हमले के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का नया विधेयक संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान को मिटाने का प्रयास है। गांधी ने इस विधेयक को प्रतिगामी बताते हुए कांग्रेस पार्टी के विरोध का स्पष्ट संकेत दिया। जानें इस विधेयक की मुख्य बातें और गांधी के विचार।
 

ट्रांसजेंडर अधिकारों पर हमला

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलार में कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित विधेयक उनके संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर सीधा हमला है, जिसका कांग्रेस पार्टी विरोध करेगी।


मंगलवार को कुछ ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने राहुल गांधी से मुलाकात की और अपनी चिंताओं को साझा किया।


राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर लिखा, "भाजपा सरकार का ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर एक स्पष्ट हमला है।"


विधेयक के खिलाफ आरोप

उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन करते हुए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान की क्षमता को छीनता है, और पूरे देश में समुदायों की सांस्कृतिक विविधता को मिटा देता है।


राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों को अमानवीय मेडिकल परीक्षाओं के लिए मजबूर करता है और सुरक्षा उपायों के बिना आपराधिक दंड और निगरानी का प्रावधान करता है।


कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार ने इस समुदाय से परामर्श नहीं किया और एक ऐसा विधेयक पेश किया जो उनकी सुरक्षा के बजाय उन्हें कलंकित करता है।


संविधान का उल्लंघन

राहुल गांधी ने कहा, "संविधान हर भारतीय के जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और सम्मान के अधिकार की रक्षा करता है। भाजपा सरकार हमारे संविधान का उल्लंघन कर रही है और अपने संकीर्ण दृष्टिकोण से ट्रांसजेंडर समुदायों को सम्मान देने के भारत के समृद्ध इतिहास को नष्ट कर रही है।"


उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है।


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक संसद में पेश किया था।


इस विधेयक में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सही पहचान सुनिश्चित करना और उनकी सुरक्षा के लिए एक उपयुक्त ढांचा आवश्यक है ताकि वे मौजूदा कानूनों का लाभ उठा सकें।