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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसदों का भाजपा में विलय: क्या है इसके पीछे की कहानी?

राज्यसभा के अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है, जिससे भाजपा की संख्या 113 हो गई है। राघव चड्ढा और अन्य सांसदों ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है, जिसके पीछे कई कारण हैं। चड्ढा ने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पहले जैसी नहीं रही। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और भविष्य की संभावनाएं।
 

राज्यसभा में बदलाव

राज्यसभा के अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद भाजपा के सदस्यों की संख्या 113 हो गई है, जबकि आम आदमी पार्टी के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की कुल संख्या 141 से बढ़कर 148 हो गई है। राज्यसभा सचिवालय ने दलों की स्थिति को अपडेट करते हुए इस परिवर्तन को आधिकारिक रूप से दर्ज किया है। 


सांसदों का विलय

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने और छह अन्य सांसदों ने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में विलय का निर्णय लिया। इस समूह में स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को इन सांसदों ने राज्यसभा के अध्यक्ष को पत्र लिखकर भाजपा में शामिल होने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। वहीं, आम आदमी पार्टी ने रविवार को एक पत्र के माध्यम से इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने सभापति राधाकृष्णन से अनुरोध किया है कि इन सांसदों को अयोग्य ठहराया जाए।


भविष्य की संभावनाएं

पिछले सप्ताह, राघव चड्ढा ने एक प्रेस वार्ता में बताया था कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सदस्यों ने संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भाजपा में विलय का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष के अंत तक राज्यसभा की 30 से अधिक सीटें खाली होने वाली हैं, जिससे भाजपा को कम से कम पांच अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं। इससे पार्टी दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकती है, जो कि 163 का आंकड़ा है।


चड्ढा का बयान

राघव चड्ढा ने अपने निर्णय पर उठ रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें हाल के दिनों में कई संदेश मिले हैं, जिनमें कुछ लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और कुछ उनके निर्णय के कारण जानना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के 15 महत्वपूर्ण वर्ष आम आदमी पार्टी को समर्पित किए और वह इसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं। उनका कहना था कि वह राजनीति में करियर बनाने नहीं आए थे, बल्कि एक विचारधारा के साथ जुड़े थे।


पार्टी की स्थिति पर सवाल

हालांकि, उन्होंने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, पार्टी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का कार्य वातावरण विषाक्त हो गया है, जहां काम करने और संसद में बोलने तक पर रोक लगाई जाती है। चड्ढा ने कहा कि उन्हें लगने लगा था कि वह सही व्यक्ति हैं लेकिन गलत पार्टी में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कई विकल्पों पर विचार किया, जिनमें राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर सुधार लाने की कोशिश करना या किसी अन्य मंच से जुड़ना शामिल था। अंततः उन्होंने नया राजनीतिक रास्ता चुनने का निर्णय लिया।


निर्णय का कारण

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी दबाव या डर के कारण नहीं लिया गया, बल्कि निराशा और असंतोष के चलते लिया गया है। उनका कहना था कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग एक साथ गलत नहीं हो सकते।