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योगी आदित्यनाथ सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, नए चेहरों की होगी एंट्री

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात की है, जिससे मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, छह नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। वर्तमान में 54 मंत्री हैं, और अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं। नए मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी हो सकता है। जानें संभावित नए मंत्रियों के नाम और विस्तार के पीछे की रणनीति।
 

योगी आदित्यनाथ का मंत्रिमंडल विस्तार

योगी आदित्यनाथ: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष चुनावों की तैयारी के मद्देनजर, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा जोरों पर है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल से मुलाकात की, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि कल उनकी सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में कल दोपहर होगा CM योगी आदित्यनाथ का मंत्रीमंडल विस्तार, इन नामों का मंत्री बनना तय

सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार में छह नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री हैं, जिनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं। विधानसभा की 403 सीटों के अनुसार, अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं, जिससे छह सीटें खाली हैं। इन खाली पदों पर नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।

संभावित नए मंत्री

  • भूपेंद्र चौधरी – जाट (ओबीसी) – पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी, मुरादाबाद के निवासी।
  • मनोज पांडेय – ब्राह्मण (सवर्ण) – सपा के बागी और रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक।
  • पूजा पाल – पाल (ओबीसी) – सपा की बागी और कौशांबी के चायल से विधायक।
  • अशोक कटारिया – गुर्जर (ओबीसी) – एमएलसी, बिजनौर के निवासी।
  • कृष्णा पासवान – पासी (एससी) – फतेहपुर की खागा से विधायक।
  • सुरेश पासी – पासी (एससी) – अमेठी के जगदीशपुर से विधायक।
  • सुरेंद्र दिलेर – वाल्मीकि (एससी) – अलीगढ़ की खैर से विधायक।
  • आशीष सिंह आशु – कुर्मी (ओबीसी) – हरदोई की मल्लवां से विधायक।

विभागों में संभावित फेरबदल

जब योगी आदित्यनाथ सरकार इन छह विधायकों को मंत्री बनाएगी, तो नए मंत्रियों को मंत्रालय आवंटित करने के लिए विभागों में फेरबदल की संभावना है। मौजूदा मंत्रियों के विभागों में अदला-बदली की जा सकती है।

यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी में चुनाव होने हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास किया जा सकता है।