महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष का एकजुट विरोध, खरगे ने उठाए सवाल
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पेश होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष के एकजुट विरोध का आह्वान किया। उन्होंने विधेयकों को असंवैधानिक बताते हुए सवाल उठाए कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित हो चुका है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह चुनावी लाभ के लिए असंवैधानिक विधेयक पेश कर रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
Apr 16, 2026, 13:54 IST
महिला आरक्षण विधेयक का विरोध
लोकसभा में संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश होने के बाद, कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के नाम पर पेश किए गए परिसीमन विधेयक का एकजुट होकर विरोध कर रहा है। खरगे ने X पर एक पोस्ट में कहा कि विपक्ष संसद को महिला आरक्षण के नाम पर पेश किए गए दोषपूर्ण परिसीमन विधेयकों के प्रभाव में नहीं आने देगा। हम एकजुट हैं और अपने लोकतंत्र पर इस कुटिल हमले का पूरी ताकत से मुकाबला करेंगे।
महिला आरक्षण विधेयक पर ऐतराज
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लागू करने वाले संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किए गए। विपक्ष ने ध्वनि मत के बजाय तीन विधेयक पेश करने के कदम के खिलाफ विभाजन की मांग की। सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन से संबंधित तीन विधेयकों को पेश किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ और ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ पेश किए, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया।
‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े। इससे पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इन्हें पेश करने के समय पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि वास्तव में विधेयक इस समय लाने का क्या मकसद है। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था, तो सरकार ने उसी समय इसे लागू क्यों नहीं किया?
सरकार पर विपक्ष का हमला
वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर डरे हुए हैं। आप असंवैधानिक विधेयक ला रहे हैं। इन्हें वापस लिया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव ने सवाल किया कि सरकार को इन विधेयकों को लाने की इतनी जल्दीबाजी क्यों है? सपा के धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि मैं संवैधानिक आधार पर इनका पुरजोर विरोध करता हूं। संसद की जिम्मेदारी संविधान की सुरक्षा की है, लेकिन इन विधेयकों से संविधान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जिस तरह परिसीमन को जनगणना से अलग किया जा रहा है, वह संविधान की भावना के विरुद्ध है।