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महिला आरक्षण विधेयक पर मोदी और खरगे के बीच तीखी बहस

महिला आरक्षण विधेयक की हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। खरगे ने मोदी को हताश बताया और कहा कि यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण का उपाय नहीं है। उन्होंने मोदी पर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा महिलाओं को प्राथमिकता नहीं देती। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और खरगे के तर्क।
 

महिला आरक्षण विधेयक पर विवाद

शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के असफल होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर कन्या भ्रूण हत्या का आरोप लगाया। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को हताश बताया और कहा कि इसे राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। खरगे ने स्पष्ट किया कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का उपाय नहीं है।


खरगे का मोदी पर पलटवार

खरगे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कुछ भी सार्थक न कर पाने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक संबोधन को कीचड़ उछालने वाले राजनीतिक भाषण में बदल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद मोदी ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया, जो लोकतंत्र और संविधान का अपमान है।


महिलाओं की प्राथमिकता पर सवाल

खरगे ने यह भी कहा कि मोदी ने कांग्रेस का 59 बार उल्लेख किया, जबकि महिलाओं का केवल कुछ ही बार। इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा महिलाओं को प्राथमिकता नहीं देती। कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और 2010 में राज्यसभा में इसे पारित कराया था।


विधेयक की स्थिति

खरगे ने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक अभी भी लागू है और इसे 16 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपना विधेयक अधिसूचित करने में तीन साल लग गए, जो उनकी नारी शक्ति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


परिसीमन विधेयकों का मुद्दा

खरगे ने परिसीमन विधेयकों को महिला आरक्षण विधेयक के साथ न मिलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह झूठ बोलना बंद करें कि यह महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन था। यह पूरी तरह से परिसीमन विधेयक था, जिसका उद्देश्य केवल भाजपा को लाभ पहुंचाना था।