महिला आरक्षण और परिसीमन पर केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
महिला आरक्षण के लिए परिसीमन की आवश्यकता
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने गुरुवार को कहा कि परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए आरक्षण और सीटों की वृद्धि केवल परिसीमन के माध्यम से संभव है। एएनआई से बातचीत में अठावले ने बताया कि विधानसभाओं में सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। सभी को सुझाव देने का अधिकार है, लेकिन परिसीमन विधेयक का विरोध करना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि परिसीमन का विरोध करना सही नहीं है। परिसीमन के बाद ही सीटों में वृद्धि संभव होगी और महिलाओं को आरक्षण भी इसी प्रक्रिया से मिलेगा।
महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया, इसे एक लंबे समय से लंबित मांग बताया। पासवान ने कहा कि यह मांग दशकों पुरानी है और महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि महिलाओं को इन अधिकारों से वंचित करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले सभी ने इसे पारित कराने के लिए प्रयास किया, लेकिन अब इसके कार्यान्वयन के समय विपक्ष इसका विरोध कर रहा है।
डीएमके का विरोध
द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) की नेता डॉ. टी. सुमति ने परिसीमन को आरक्षण से जोड़ने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु की जनता और पार्टी के सदस्यों से आगामी परिसीमन विधेयक के खिलाफ काले कपड़े पहनने का आह्वान किया है। सुमति ने कहा कि डीएमके हमेशा महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करेगी, लेकिन इसे इस कठोर परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है, यह चिंता का विषय है।
विपक्ष का विभाजन का आह्वान
विपक्ष ने तीन विधेयकों को ध्वनि मत से प्रस्तुत करने के बजाय विभाजन का आह्वान किया। इस संदर्भ में, परिसीमन विधेयक, 2026, संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया।