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महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुट एक साथ चुनाव लड़ेंगे

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अजित पवार और शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी के दोनों गुट आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में एकजुट होकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह घोषणा पुणे नगर निगम चुनाव में असफलता के बाद की गई है। भाजपा ने इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। एनसीपी के नेता शशिकांत शिंदे ने बताया कि दोनों गुट मिलकर चुनाव लड़ेंगे और आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। जानें इस गठबंधन के पीछे की कहानी और आगामी चुनावों की तैयारी के बारे में।
 

एनसीपी के गुटों का चुनावी गठबंधन

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुट आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में एकजुट होकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह जानकारी शनिवार को एनसीपी (एसपी) के एक नेता ने साझा की। पुणे नगर निगम चुनाव में दोनों गुटों के गठबंधन की असफलता के बाद यह घोषणा की गई है। यह नगर निकाय पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने यहां दोनों एनसीपी गुटों को चौंका दिया।


पुणे नगर निगम चुनाव का परिणाम

भाजपा ने 165 सीटों वाले नगर निकाय में 119 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि एनसीपी (आंध्र प्रदेश) को केवल 27 सीटें मिलीं और एनसीपी एसपी को महज तीन सीटें प्राप्त हुईं। एनसीपी एसपी के महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने पुष्टि की कि दोनों गुट जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के लिए गठबंधन करेंगे। ये चुनाव 5 फरवरी को आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई है और हम 12 जिला परिषदों के चुनाव मिलकर लड़ेंगे।


आगे की रणनीति

शिंदे ने कहा कि एनसीपी (एसपी) अपने नगर निगम चुनाव के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगी और उसी के अनुसार अपनी आगे की रणनीति बनाएगी। पुणे की बारामती तहसील में एक कृषि प्रदर्शनी के दौरान शिंदे की मुलाकात पार्टी प्रमुख शरद पवार से हुई, जिसके बाद पवार के आवास पर दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अजीत पवार, सांसद सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार, जयंत पाटिल और राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे शामिल थे।


गठबंधन की संभावनाएं

इस बैठक ने दोनों एनसीपी गुटों के संभावित पुनर्मिलन की अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि, शिंदे ने स्पष्ट किया कि बैठक में पुनर्मिलन पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत का मुख्य फोकस आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों पर था, और दोनों गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति जताई। महाराष्ट्र में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव 5 फरवरी को होंगे, जबकि मतगणना 7 फरवरी को की जाएगी।