भाजपा ने भगवंत मान को भेजा मानहानि का नोटिस, बम धमाकों पर उठाए सवाल
भाजपा का कानूनी नोटिस
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को जालंधर और अमृतसर में हुए दोहरे बम धमाकों के लिए भाजपा को दोषी ठहराने के उनके बयान पर मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा। उन्होंने मान से अपने आरोपों का सबूत पेश करने या अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की। मंगलवार रात पंजाब में सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट हुए दो सिलसिलेवार धमाकों ने दहशत फैला दी, जिसके बाद विपक्षी दलों ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने भगवंत मान सरकार पर राज्य में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री का आरोप
बुधवार को मान ने इन धमाकों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी इसी तरह कर रही है। पहला विस्फोट जालंधर में सीमा सुरक्षा बल के पंजाब फ्रंटियर मुख्यालय के बाहर रात करीब 8 बजे हुआ, जबकि दूसरा विस्फोट अमृतसर के खासा में सेना शिविर के पास रात करीब 11 बजे हुआ। भाजपा नेता चुघ ने मान के बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि मान ने बिना किसी प्रमाण के भाजपा पर बम धमाकों में शामिल होने का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को धूमिल किया है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
चुघ ने पत्रकारों से कहा कि इसी कारण उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि, झूठी सूचना फैलाने और जन अशांति भड़काने के प्रयास के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री मान का बयान उनके अपने डीजीपी के रुख के विपरीत है। जबकि पंजाब पुलिस पाकिस्तान की आईएसआई और विदेशी नेटवर्क की संलिप्तता की ओर इशारा कर रही है, मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में व्यस्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री पंजाब की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं या राष्ट्रविरोधी ताकतों को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं?
राजनीतिक झूठ का आरोप
चुघ ने कहा कि जिस दिन पूरा देश ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर हमारी सशस्त्र सेनाओं के साहस का जश्न मना रहा है, उस दिन मान का भाजपा जैसी लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी पार्टी को धमाकों से जोड़ना न केवल एक राजनीतिक झूठ है, बल्कि लाखों भारतीयों के जनादेश और विश्वास का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि मान का बयान न केवल मानहानिकारक है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना आरोप पंजाब में भ्रम, अविश्वास और सामाजिक अशांति पैदा कर सकते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री को राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का अधिकार नहीं है।