प्रधानमंत्री मोदी ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 4,399 दिन की सेवा पूरी की
भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय
आज का दिन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकतांत्रिक तरीके से चुने जाने के बाद भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं, जिससे उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
नेहरू और इंदिरा गांधी का कार्यकाल
पंडित नेहरू ने अगस्त 1947 से मई 1964 तक इस पद पर कार्य किया, जिसमें उनके प्रारंभिक कार्यकाल का एक अंतरिम दौर भी शामिल था। वहीं, इंदिरा गांधी ने लगभग 16 वर्षों तक सेवा की, लेकिन उनका कार्यकाल दो अलग-अलग समय में बंटा हुआ था। इस प्रकार, पीएम मोदी अब लगातार लोकतांत्रिक जनादेश के माध्यम से पद पर बने रहने के मामले में शीर्ष पर पहुंच गए हैं।
राजनीतिक ताकत और ऐतिहासिक जीत
पीएम मोदी की यह उपलब्धि उनके 12 वर्षों के सफल नेतृत्व को दर्शाती है। इस दौरान, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने न केवल अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि नए क्षेत्रों में भी अपने जनाधार का विस्तार किया। हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत ने पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्साह को और बढ़ा दिया है।
NDA की विशेष बैठक
इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के शीर्ष नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में 72 प्रमुख नेता शामिल होंगे, जो पीएम मोदी के नेतृत्व और उनके सुशासन के रिकॉर्ड को सम्मानित करने के लिए एक विशेष प्रस्ताव पारित करेंगे।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को 140 करोड़ देशवासियों के विश्वास को समर्पित किया। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और किसानों को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।"
12 वर्षों का सफर
26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बनने के बाद, मोदी ने 2019 और 2024 के आम चुनावों में लगातार जनादेश प्राप्त किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन ने पिछले 12 वर्षों की प्रमुख नीतियों का उल्लेख करते हुए इसे रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का बेहतरीन उदाहरण बताया।
वैश्विक पहचान
पीएम मोदी के इस कार्यकाल की सराहना वैश्विक स्तर पर भी हो रही है। श्रीलंका के राष्ट्रपति और पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए एक प्रेरणा है।