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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की मुख्यमंत्री पद से विदाई

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने ममता बनर्जी का मंत्रिमंडल भंग कर दिया है, जिससे वह अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं। बनर्जी ने भाजपा पर वोटों की चोरी और अनैतिक चुनाव जीतने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी हार एक साजिश का परिणाम है। इसके अलावा, उन्होंने मतगणना में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 100 सीटें लूटी गई हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
 

राज्यपाल ने मंत्रिमंडल भंग किया

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य का मंत्रिमंडल भंग कर दिया है, जिससे ममता बनर्जी, जो तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं, अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं। 71 वर्षीय बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने वोटों की चोरी की है और अनैतिक तरीके से चुनाव जीते हैं।


भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों पर जीत हासिल की, जिससे तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हुआ। बनर्जी ने चुनाव परिणाम को "षड्यंत्रित" बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से लड़ाई कर रही है, भाजपा से नहीं।


टीएमसी की स्थिति

तृणमूल कांग्रेस को केवल 80 सीटें मिलीं। बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा, "मैं इस्तीफा क्यों दूं? हम हार नहीं गए हैं। जनादेश लूटा गया है।" उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उनकी हार एक साजिश का परिणाम है।


उनका लहजा कभी शिकायत भरा था तो कभी आक्रामक।


अनियमितताओं के आरोप

बनर्जी ने मतगणना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 100 सीटें लूटी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना की गति जानबूझकर धीमी की गई थी ताकि उनकी पार्टी का मनोबल गिर सके।


उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मतगणना केंद्र में धकेला गया और बदसलूकी की गई। केंद्रीय बल के जवानों पर गुंडों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए, बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर भी हमला किया और कहा कि यह एक काला अध्याय है। संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव हारने के बाद पद छोड़ने से इनकार करने की स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।