पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी की जीत के लिए मुस्लिम वोटर्स की सक्रियता
पश्चिम बंगाल के चुनाव में भारी मतदान के साथ-साथ हिंसा की घटनाएं भी हुईं। ममता बनर्जी ने अपने मुस्लिम वोट बैंक को सक्रिय किया, जिससे बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता मतदान के लिए निकले। इस बार हिंदू मतदाता भी बीजेपी की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, जो चुनाव में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। जानिए कैसे मुस्लिम वोटर्स ममता को जिताने के लिए जुटे हैं और 2026 का चुनाव किस तरह अलग हो सकता है।
Apr 24, 2026, 10:49 IST
पश्चिम बंगाल चुनाव में हिंसा और वोटिंग
पश्चिम बंगाल के पहले चरण के चुनाव में भारी मतदान हुआ, लेकिन इसके साथ ही हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। दक्षिण मिदनापुर में बीजेपी के उम्मीदवार सुभेंदु सरकार पर हमला किया गया, जबकि आसनसोल साउथ सीट पर अग्निमित्रा पॉल की कार पर भी हमले की खबरें आईं। यदि ऐसी घटनाएं किसी अन्य राज्य में होतीं, तो लोकतंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा होता। लेकिन पश्चिम बंगाल में इस हिंसा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इस बीच, ममता बनर्जी को समर्थन देने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचे। आपको याद होगा कि ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि अगर तृणमूल पार्टी सत्ता में रही, तो फिर मिलेंगे।
मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका
कई लोगों को लगा कि ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले हार मान ली है, लेकिन उन्होंने अपने मुस्लिम वोट बैंक को सक्रिय किया। ममता ने अपने समर्थकों को स्पष्ट संकेत दिया कि उन्हें जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएं, अन्यथा बीजेपी की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस बयान का प्रभाव यह हुआ कि बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता घरों से बाहर निकलकर ममता को वोट देने पहुंचे। इस बार हिंदू मतदाता भी बीजेपी की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं, जो चुनाव में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।
मुस्लिम वोट बैंक का महत्व
बीजेपी और ममता बनर्जी के बीच मुस्लिम वोट बैंक एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की जनसंख्या लगभग 27% है, और यही वोट बैंक यह तय करता है कि सरकार किसकी बनेगी। 2021 में 44 मुस्लिम विधायक बने थे, जिनमें से 43 तृणमूल के थे। इसका मतलब यह है कि मुस्लिम मतदाता अब कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों में बंटने के बजाय ममता बनर्जी के समर्थन में एकजुट हो गए हैं। इस बार भी मुस्लिम वोटर्स ममता को जिताने के लिए सक्रिय हैं। हालांकि, 2026 का चुनाव कुछ अलग होगा, क्योंकि यह एसआईआर के बाद का पहला चुनाव है, जिसमें 91 लाख वोट कट गए थे। इसलिए, बंगाल के विभिन्न राज्यों में बसे मतदाता बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए लौट रहे हैं।