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दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर माकपा का कड़ा विरोध, आइशी घोष की गिरफ्तारी का आरोप

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसने 2021 के ‘बंग भवन’ विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी मुख्यालय में अवैध तरीके से प्रवेश किया। माकपा के महासचिव एम. ए. बेबी ने इसे लोकतांत्रिक मानदंडों पर गंभीर हमला बताया। इस घटना के बाद, जॉन ब्रिटास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि यह एक राजनीतिक दल के कार्यालय में घुसपैठ है। माकपा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
 

माकपा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की

नई दिल्ली, 28 जुलाई: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने 2021 के ‘बंग भवन’ विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) की संयुक्त सचिव आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय में अवैध तरीके से प्रवेश किया। वामपंथी दल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ए.के.जी. भवन में सादे कपड़ों में मौजूद एक व्यक्ति सहित पुलिसकर्मियों से सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। माकपा के महासचिव एम. ए. बेबी ने इस घटना को दिल्ली पुलिस द्वारा आइशी घोष की गिरफ्तारी के लिए पार्टी मुख्यालय में प्रवेश का ‘‘गैरकानूनी प्रयास’’ बताते हुए इसे ‘‘लोकतांत्रिक मानदंडों पर गंभीर हमला’’ कहा।


बेबी ने आरोप लगाया, ‘‘पुलिस निजी वाहन से आई थी और कुछ कर्मी वर्दी में नहीं थे। जब माकपा सांसद जॉन ब्रिटास और अन्य ने उनका विरोध किया, तो वे बिना अपने प्रयास को पूरा किए वहां से चले गए।’’ उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से आइशी घोष की निगरानी की जा रही थी। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘एक जांच अधिकारी (आईओ) अदालत के आदेश के अनुपालन में एक पुराने गैर-जमानती वारंट के मामले में वहां गया था। यह दौरा वर्तमान मामले से संबंधित नहीं था।’’


ब्रिटास ने कहा कि पुलिस दल शाम करीब साढ़े चार बजे ए.के.जी. भवन पहुंचा और दावा किया कि आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने उनसे वारंट दिखाने को कहा, तो उन्होंने बताया कि इसकी सूचना उन्हें केवल टेलीफोन पर दी गई है। इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई को होनी है।’’


ब्रिटास ने कहा कि यह मामला 2021 में ‘बंग भवन’ के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है और उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया था, कोई बड़ा अपराध नहीं किया है।’’ माकपा नेता ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से पुलिस आइशी घोष का ‘पीछा’ कर रही थी और परिसर में प्रवेश करने वाले अधिकारियों में से एक वर्दी में नहीं था। माकपा ने इसे ‘‘एक राजनीतिक दल के कार्यालय में खुलेआम घुसपैठ’’ और ‘‘छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जारी उत्पीड़न’’ करार देते हुए कहा कि यह ‘‘लोकतांत्रिक अधिकारों पर मोदी सरकार के बढ़ते हमले को उजागर करता है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों को जेल भेजने पर आमादा हैं। वे पुराने मामलों को निकाल रहे हैं। हम इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’ माकपा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘छात्रों की जायज चिंताओं का समाधान करने के बजाय पुलिस शक्ति का इस्तेमाल कर असहमति की आवाज को डराने, दबाने और अपराध घोषित करने का प्रयास कर रही है।’’ पार्टी ने कहा, ‘‘माकपा इस गैरकानूनी कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है और न्याय, शिक्षा तथा लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है।’’


केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी दिल्ली पुलिस की निंदा की। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘‘लोकतंत्र पर गंभीर हमला’’ और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। विजयन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने केंद्र सरकार के राजनीतिक हितों के अनुरूप कार्रवाई की।


विजयन ने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस द्वारा माकपा की केंद्रीय समिति के कार्यालय में प्रवेश कर एसएफआई की नेता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने का प्रयास बेहद निंदनीय है।’’ केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार के राजनीतिक हितों के अनुरूप काम कर रही दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई लोकतंत्र पर गंभीर हमला और एक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।’’