तृणमूल कांग्रेस में बढ़ता आंतरिक विद्रोह: राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं
तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक संकट
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा आंतरिक विद्रोह अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। हाल ही में, पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बारिक ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा पिछले एक हफ्ते में संसद से इस्तीफा देने वाले तीसरे TMC सांसद का है। बारिक से पहले, दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने भी अपने पदों से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को संकट में डाल दिया था।
राज्यसभा में सांसदों की संख्या में कमी
बारिक के इस्तीफे के बाद, राज्यसभा में TMC के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह जाएगी। सूत्रों के अनुसार, अगले हफ्ते तीन और सांसदों के इस्तीफे की संभावना है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।
विद्रोह की शुरुआत
इस संकट की शुरुआत सोमवार को ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से हुई। उस समय, ममता दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के साथ बैठकें कर रही थीं, जिसमें सोनिया गांधी भी शामिल थीं। वे भाजपा के खिलाफ विपक्ष की रणनीति बनाने और 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भविष्य पर चर्चा कर रही थीं।
बागी विधायकों का समर्थन
ममता की विधायी पार्टी पर पकड़ कमजोर होती जा रही है; उनके 80 में से 58 विधायकों ने बागी विधायक रिताब्रत बनर्जी का समर्थन किया है, और यह संख्या अब 64 तक पहुंच गई है। रिताब्रत, जिन्हें ममता की नाराज़गी के बावजूद विपक्ष का नेता चुना गया था, का कहना है कि और विधायक जल्द ही बागी खेमे में शामिल होंगे।
दिल्ली में संकट का विस्तार
जैसे ही विधानसभा में ममता का खेमा कमजोर हुआ, यह विद्रोह दिल्ली तक भी फैल गया। राज्यसभा में, रॉय ने इस्तीफों की एक श्रृंखला शुरू की, जिसके बाद सुष्मिता देव और बारिक ने भी इस्तीफा दिया। सूत्रों का कहना है कि अगले हफ्ते के अंत तक तीन और सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं।
लोकसभा में भी संकट
यह संकट केवल बंगाल विधानसभा और राज्यसभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से लोकसभा तक भी फैल गया। बुधवार को, जब ममता दिल्ली से कोलकाता लौटीं, तो सूत्रों ने बताया कि 19 लोकसभा सांसदों ने कथित तौर पर उनसे अलग होकर NDA में शामिल होने की इच्छा जताई है।