तमिलनाडु में परिसीमन प्रक्रिया का विरोध: मुख्यमंत्री की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक
चेन्नई, 8 अगस्त: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को गठबंधन सहयोगियों और मित्र दलों के सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करने का निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अन्य प्रमुख द्रविड़ दलों तथा अन्नाद्रमुक ने भाग नहीं लिया।
द्रमुक और अन्नाद्रमुक की प्रतिक्रिया
द्रमुक ने बैठक को 'तमाशा' करार दिया, जबकि अन्नाद्रमुक ने इसे 'जल्दबाजी में किया गया नाटक' बताया। सरकार के बयान में कहा गया कि सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा के बीच सीटों के अनुपात को 2.2:1 बनाए रखने की मांग की। इसके अलावा, यह भी तय किया गया कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की अपील
बैठक के अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों और राजनीतिक दलों से तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को वापस लेना चाहिए, क्योंकि इससे राज्य के प्रतिनिधित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कानून मंत्री का बयान
कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में इस प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में 543 सदस्यों की संख्या में कोई बदलाव की आवश्यकता नहीं है।
बैठक में शामिल सांसदों की संख्या
बैठक में कुल 19 सांसद शामिल हुए, जिनमें टीवीके के सहयोगी दलों के सांसद भी शामिल थे। वीसीके प्रमुख ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए।
द्रमुक और अन्नाद्रमुक की अनुपस्थिति
द्रमुक के सहयोगी दलों ने बैठक में भाग नहीं लिया, और अन्नाद्रमुक ने इसे 'जल्दबाजी में रचा गया नाटक' बताया। द्रमुक के एक सांसद ने कहा कि सांसदों को आमंत्रित करना गलत था और सरकार को पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बुलाना चाहिए था।
द्रमुक की प्रतिबद्धता
द्रमुक ने तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पार्टी प्रमुख एम. के. स्टालिन ने परिसीमन के खिलाफ आवाज उठाई थी और राज्य के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है।