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तमिलनाडु चुनाव में एमके स्टालिन की हार: वीएस बाबू ने किया बड़ा उलटफेर

तमिलनाडु में हालिया चुनावों ने एक बड़ा उलटफेर देखा है, जहां मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को वीएस बाबू ने हराया। बाबू, जो पहले डीएमके के नेता थे, ने अपनी नई पार्टी टीवी के साथ चुनावी मैदान में कदम रखा और कोलाथूर सीट पर जीत हासिल की। इस चुनावी नतीजे ने न केवल स्टालिन की हार को दर्शाया, बल्कि बाबू की रणनीति और चुनाव प्रचार के तरीके को भी उजागर किया। जानें इस दिलचस्प चुनावी कहानी के बारे में और अधिक।
 

चुनाव में बड़ा उलटफेर

कई बार चुनावी परिणाम इतने चौंकाने वाले होते हैं कि सत्ताधारी पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ तमिलनाडु में देखने को मिला है। सत्ताधारी पार्टी डीएमके को हार का सामना करना पड़ा है, और इसके नेता तथा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट भी नहीं बचा सके। उन्हें हराने वाले नेता टी वीके के वी एस बाबू हैं, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। कोलाथूर सीट, जो चेन्नई जिले में स्थित है, से वी एस बाबू ने स्टालिन को हराया। यह सीट मुख्यमंत्री के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थी, और बाबू ने यहां 82997 वोट प्राप्त किए, जबकि स्टालिन को 74202 वोट मिले। इस प्रकार, स्टालिन 8795 वोटों के अंतर से हार गए हैं।   


वीएस बाबू का परिचय

वीएस बाबू हैं कौन? 

वीएस बाबू एक अनुभवी नेता हैं, जिनकी उम्र 75 वर्ष है। उन्होंने पहले डीएमके के लिए काम किया है और 2006 में इसी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे। तब उन्होंने एआईए डीएमके के उम्मीदवार को 90,000 वोटों से हराया था। जब विजय ने अपनी पार्टी टीवी का गठन किया, तब बाबू ने 7 फरवरी 2026 को इस पार्टी में शामिल होकर स्टालिन के खिलाफ कोलाथूर सीट से चुनाव लड़ा। उनके चुनाव प्रचार की रणनीति भी दिलचस्प थी, जिसमें उन्होंने विजय के जैसे दिखने वाले बहरूपियों का सहारा लिया। यह तकनीक उनके लिए जीत का एक महत्वपूर्ण कारण बन गई। तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ था।


डीएमके के सिपहसालार

कभी डीएमके के थे सिपहसालार

बाबू ने 2006 में डीएमके के उम्मीदवार के रूप में पुरा सावलकम सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने एआईए डीएमके के प्रतिद्वंदी को 90,000 वोटों से हराया। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, वे केवल आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं और उनकी संपत्ति लगभग 3 करोड़ 70 लाख है। उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है और उन पर कोई आपराधिक मामला भी नहीं है। 2011 में, डीएमके ने उन्हें कोलथुर विधानसभा सीट का चुनावी प्रभारी बनाया था। उस समय स्टालिन ने मुश्किल से एआईए डीएमके के एस एस दुरसामी को हराया था। इसके बाद बाबू ने डीएमके छोड़कर एआईए डीएमके में शामिल हो गए। फिर फरवरी 2026 में, जब विजय ने अपनी नई पार्टी टीवी का गठन किया, तो बाबू ने उनके साथ जुड़कर चुनावी मैदान में कदम रखा।