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डी. के. शिवकुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात को बताया सामान्य राजनीतिक संवाद

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने राहुल गांधी के साथ अपनी हालिया मुलाकात को सामान्य राजनीतिक बातचीत बताया। उन्होंने कावेरी विवाद पर अदालत के फैसले और पार्टी के भीतर संवाद को लेकर अपने विचार साझा किए। शिवकुमार ने कहा कि वह दिल्ली में राहुल गांधी से असम विधानसभा चुनावों पर चर्चा करेंगे। इस मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही विभिन्न व्याख्याओं को उन्होंने खारिज किया। जानें इस मुलाकात के पीछे की पूरी कहानी और शिवकुमार के विचार।
 

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री की राहुल गांधी से मुलाकात

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ उनकी हाल की मुलाकात एक सामान्य राजनीतिक संवाद का हिस्सा थी और इसे किसी विशेष अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए।


उन्होंने यह भी बताया कि वह विभिन्न मुद्दों पर पार्टी के नेतृत्व के साथ संवाद जारी रखेंगे।


शिवकुमार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा किया जिसमें लिखा था, "प्रयास विफल हो सकते हैं, लेकिन प्रार्थनाएं नहीं।" यह पोस्ट कावेरी विवाद से संबंधित घटनाक्रम पर आधारित था।


उन्होंने कहा, "मेरी याचिका के कारण कावेरी मुद्दे ने अदालत में नया मोड़ लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि उसे मेकेदातु बैलेंसिंग जलाशय के मुद्दे पर निर्णय लेना होगा। इसलिए मैंने यह ट्वीट किया।"


पत्रकारों द्वारा की जा रही विभिन्न व्याख्याओं को खारिज करते हुए, शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी से बातचीत की, लेकिन इस चर्चा के विवरण का खुलासा नहीं कर सकते।


उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि मैंने उनसे बात नहीं की। यह मेरी और उनकी व्यक्तिगत बात है।"


शिवकुमार ने बताया कि वह शुक्रवार को दिल्ली जाएंगे, जहां उनकी राहुल गांधी से असम विधानसभा चुनावों पर बैठक होगी।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से हुई मुलाकात के बारे में कहा कि राज्य इकाई के अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत करना पार्टी प्रोटोकॉल का हिस्सा है।


राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनके समर्थकों की खुशी पर प्रतिक्रिया देते हुए, शिवकुमार ने कहा कि उन्हें ऐसी प्रतिक्रियाओं की जानकारी नहीं है।


उन्होंने कहा, "राहुल गांधी से मेरी मुलाकात कोई नई बात नहीं है। यह ऐसी बात नहीं है जिस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की जा सके।"