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कांग्रेस नेता सिंहवी ने महाभियोग प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंहवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने की प्रक्रिया की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अब केवल एक व्यक्ति के निर्णय तक सीमित हो गई है, जिससे लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है। सिंहवी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति महाभियोग की कार्यवाही को प्रभावित करती है। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और चिंताएं।
 

महाभियोग प्रस्ताव पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंहवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव को अस्वीकार करने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महाभियोग की प्रक्रिया अब केवल एक व्यक्ति के निर्णय तक सीमित हो गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, सिंहवी ने इस बात पर जोर दिया कि यह स्थिति लोकतंत्र के मंदिर और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायिक निकाय की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।


 


सिंहवी ने पीठासीन अधिकारी की संवैधानिक शक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि कुछ निर्णय एक ही व्यक्ति के हाथों में इस हद तक सौंप दिए जाएंगे कि उनकी जवाबदेही समाप्त हो जाएगी? उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित महाभियोग की छह अवस्थाओं का उल्लेख किया, जिसमें स्वीकारोक्ति चरण, समिति का गठन, आरोपों का निर्धारण, रिपोर्ट प्रस्तुत करना, संसदीय चर्चा और राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाने की कार्रवाई शामिल हैं।


 


सिंहवी ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश ने इन सभी चरणों को पीठासीन अधिकारी के विवेकाधिकार में समाहित कर दिया है, जिससे प्रक्रिया का पहला चरण ही समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति महाभियोग की कार्यवाही को प्रभावित करती है और संसदीय विवेक की प्रक्रिया को कमजोर करती है।


 


सिंहवी ने आगे कहा कि यह प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है और एक छोटे से मुकदमे की तरह कार्य करती है। उन्होंने कहा कि यदि पीठासीन अधिकारी अपनी राय देता है, तो महाभियोग की कार्यवाही संभव नहीं है।


 


उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए जारी किया गया आदेश न्यायिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को एक व्यक्ति के निर्णय में मिला देता है। सिंहवी ने कहा कि संसद को संविधान के तहत महाभियोग प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए, लेकिन यह प्रक्रिया अब दरकिनार की जा रही है।