कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव का तीखा हमला
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र जाति जनगणना कराने से बच रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के पिछले कुछ वर्षों के बदलते रुख को उजागर करते हुए इसे देश को गुमराह करने वाला बताया।
सरकार के बयानों पर सवाल उठाए
जयराम रमेश ने सरकार के पूर्व के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा, 'जुलाई 2021 में, सरकार ने लोकसभा में कहा था कि एससी (SC) और एसटी (ST) के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं की जाएगी। सितंबर 2021 में, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर इसे एक नीतिगत निर्णय बताया गया था। अप्रैल 2024 में, प्रधानमंत्री ने जाति जनगणना की मांग को 'अर्बन नक्सल मानसिकता' करार दिया था।'
इसके बाद, अप्रैल 2025 में, सरकार ने अचानक घोषणा की कि आगामी जनगणना के हिस्से के रूप में जाति जनगणना कराई जाएगी।
डिजिटल जनगणना में देरी पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने रजिस्ट्रार जनरल द्वारा मार्च 2026 में दिए गए बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पूरी जनगणना डिजिटल होने के कारण इसके परिणाम 2027 तक उपलब्ध होंगे। जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि अब सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन कर यह क्यों कह रही है कि परिणामों में कई साल लगेंगे? उन्होंने उदाहरण दिया कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने छह महीने से भी कम समय में जातिगत सर्वेक्षण पूरा कर लिया था।
छिपा हुआ एजेंडा
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश में भ्रम फैला रहे हैं और सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित प्रावधानों में बदलाव करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का 'छिपा हुआ एजेंडा' यही है कि जाति जनगणना को कभी भी लागू न होने दिया जाए और इसे तकनीकी कारणों से लटकाए रखा जाए।