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कांग्रेस ने अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर भाजपा को घेरा

कांग्रेस ने अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भाजपा सरकार पर हमला किया है। पार्टी का कहना है कि इस्लामाबाद की मेज़बानी भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी इस स्थिति को संभालने में असमर्थ हैं। रमेश ने पाकिस्तान की नई कूटनीतिक भूमिका और मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। यह स्थिति भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
 

कांग्रेस का नया हमला

कांग्रेस ने सोमवार को अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। पार्टी का कहना है कि इस्लामाबाद द्वारा वार्ता के दूसरे चरण की मेज़बानी भारत के लिए एक गंभीर कूटनीतिक झटका है। विपक्षी दल ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की बढ़ती लोकप्रियता भारत की कूटनीतिक रणनीति में व्यापक बदलाव की आवश्यकता को दर्शाती है।


जयराम रमेश की टिप्पणियाँ

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा कि विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ कहा, वह आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेज़बानी कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह के कूटनीतिक परिवर्तनों में असमर्थ हैं। रमेश की यह टिप्पणी विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत वैश्विक भू-राजनीति में मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। यह बयान पाकिस्तान द्वारा वार्ता में मध्यस्थता करने के सवाल पर दिया गया था।


पाकिस्तान की नई भूमिका

रमेश ने आगे कहा कि ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकवादियों को पनाह देने के बाद पाकिस्तान अब एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदारी पाकिस्तान को अलग-थलग करने में असफल रही है, बल्कि उसे एक नई पहचान मिली है। रमेश ने यह भी बताया कि नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार पाकिस्तान को अलग थलग करने में सफल रही थी।


फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति

रमेश ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जिनके भड़काऊ बयानों ने पहलगाम आतंकवादी हमले को बढ़ावा दिया, अब राष्ट्रपति ट्रंप के प्रिय बन गए हैं। यह भारत के लिए एक गंभीर झटका है। यह स्पष्ट है कि फील्ड मार्शल और उनके सहयोगी ट्रंप के परिवार और सहयोगियों के साथ बेहतर संबंध बनाने में सफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका है। रमेश ने कहा, 'भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति में मौलिक बदलाव की आवश्यकता है, जिसे प्रधानमंत्री मोदी करने में असमर्थ हैं।'