कर्नाटक में विध्वंस अभियान पर शशि थरूर का बचाव
कर्नाटक सरकार के विध्वंस अभियान का समर्थन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बेंगलुरु में कर्नाटक सरकार द्वारा चलाए गए विध्वंस अभियान का समर्थन किया, जिसने पिछले महीने दक्षिण भारत में पार्टी के भीतर हलचल पैदा की। थरूर ने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और प्रभावित निवासियों को वैकल्पिक आवास का आश्वासन दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भूमि पर मकान बने थे, वह सरकारी संपत्ति थी।
थरूर ने कहा कि यह भूमि सरकारी थी और लोग वहां अवैध रूप से निवास कर रहे थे। इसके अलावा, यह स्थान कचरे का ढेर था और जहरीले कचरे के कारण पानी भी दूषित हो गया था, इसलिए यह लोगों के लिए रहने के लिए उपयुक्त नहीं था।
विध्वंस के बारे में थरूर की राय
इस विवाद पर अपनी राय व्यक्त करते हुए थरूर ने कहा कि विध्वंस से पहले निवासियों को सूचित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों के आधार पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाना उचित नहीं है। सरकार ने अस्थायी आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है और स्थायी आवास देने का वादा किया है।
थरूर ने कहा कि चूंकि समाधान मिल चुका है, इसलिए इस मुद्दे को बेवजह उठाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में कुछ खामियां हो सकती हैं, लेकिन समाधान खोजने का वादा किया गया है।
कर्नाटक सरकार की कार्रवाई पर थरूर का दृष्टिकोण
थरूर ने कहा कि सभी कार्रवाई कानूनी रूप से की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए यह कदम उठाया है। नोटिस जारी किए गए थे, और कई मामलों में विध्वंस से पहले कई बार नोटिस दिए गए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कर्नाटक का दौरा नहीं किया है, इसलिए उन्हें इस मामले पर कोई निश्चित राय देने का अधिकार नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद 20 दिसंबर को येलाहांका के पास कोगिला लेआउट से कई परिवारों को बेदखल किए जाने के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद कर्नाटक सरकार को पार्टी के भीतर से विरोध और बाहर से आलोचना का सामना करना पड़ा। केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे "बुलडोजर राज" का उदाहरण बताया।