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कंगना रनौत ने राहुल गांधी के व्यवहार पर उठाए सवाल, संसद में बढ़ा विवाद

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने लोकसभा में राहुल गांधी के व्यवहार पर तीखा हमला किया, आरोप लगाते हुए कहा कि उनका आचरण महिलाओं को असहज करता है। इस पर 200 से अधिक पूर्व नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने एक पत्र जारी कर चिंता व्यक्त की है। पत्र में संसद की मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इस विवाद ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी नेता आमने-सामने हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनका व्यवहार महिलाओं को असहज करता है और उनमें शिष्टाचार की कमी है। संसद में राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाते हुए, रनौत ने कहा कि महिलाएं उनके सामने असहज महसूस करती हैं, क्योंकि वह एकदम 'टपोरी' अंदाज में आते हैं और लोगों से 'ऐ तू' कहकर बात करते हैं। उनका आक्रामक और अनियंत्रित बोलने का तरीका दूसरों को बीच में रोकने का भी है, जो बहुत असहज है। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल को अपनी बहन का उदाहरण लेना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं करते।


राहुल गांधी के आचरण पर बढ़ती चिंताएं

राहुल गांधी के संसद परिसर में कथित आचरण को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को 200 से अधिक पूर्व नौकरशाहों, राजनयिकों और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने एक खुला पत्र जारी कर उनके व्यवहार पर चिंता व्यक्त की। पत्र में संसद परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शनों की आलोचना की गई, जिसमें सीढ़ियों पर प्रदर्शन और अनौपचारिक सभाएं शामिल थीं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि यह व्यवहार अनुचित है और स्थापित मानदंडों के खिलाफ है।


संसद की मर्यादा और लोकतंत्र

पत्र में यह भी कहा गया कि संसद भारत का सर्वोच्च संवैधानिक मंच है, जहां जनता की सामूहिक इच्छा व्यक्त की जाती है और कानून बनाए जाते हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि संसद परिसर में मर्यादा बनाए रखना केवल परंपरा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की संवैधानिक भावना का एक अनिवार्य हिस्सा है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की है।


राजनीतिक बहस का आगाज़

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, जिसमें सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस नेता पर संस्थागत मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्षी नेता इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए इसका बचाव कर रहे हैं.


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