उमर अब्दुल्ला ने महबूबा मुफ्ती के बयान पर उठाए सवाल
महबूबा मुफ्ती को माफी मांगने की सलाह
(फाइल फोटो के साथ) श्रीनगर, 27 जुलाई: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जंतर-मंतर जाने के बजाय अपने घर पर रहना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मुफ्ती को कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को सही ठहराने के लिए माफी मांगनी चाहिए। अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पूर्व में सत्ता में रह चुके नेताओं के ‘‘गैर-जिम्मेदाराना’’ बयानों से आम लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ने से हतोत्साहित हो सकते हैं। महबूबा ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर जाकर परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में प्रदर्शन का समर्थन किया था.
महबूबा के बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए, पीडीपी प्रमुख ने घाटी में पहले हुए ‘पैलेट गन’ के उपयोग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर की स्थिति अलग है क्योंकि वहां सुरक्षा बल आतंकवाद से लड़ रहे हैं। मुफ्ती की इन टिप्पणियों पर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और अन्य विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पीडीपी ने आरोप लगाया कि नेकां ने महबूबा के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सहारा लिया।
अब्दुल्ला का बयान
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘जब एक पूर्व मुख्यमंत्री यह कहती हैं कि कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए बल का उपयोग सही है, तो लोग अपने अधिकारों के लिए कैसे आगे आएंगे? बेहतर होता कि वह जंतर-मंतर नहीं जातीं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि जब नेता केंद्र द्वारा किए जा रहे दमन का समर्थन करते हैं, तो लोग राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन करने में संकोच करेंगे।
महबूबा के बयान पर सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि महबूबा जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के लिए जंतर-मंतर नहीं गई थीं, बल्कि वह छात्रों के विरोध में शामिल होने गई थीं। उन्होंने कहा, ‘‘वह आतंकवाद से लड़ने के बहाने सत्ता और बल के दुरुपयोग को सही ठहरा रही हैं।’’ अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि क्या आतंकवाद के कारण बच्चों को न्याय नहीं मिलना चाहिए और क्या कानून लागू नहीं होना चाहिए।
महबूबा को माफी मांगने की आवश्यकता
अब्दुल्ला ने कहा कि महबूबा को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने पिछले हफ्ते अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर लोगों की गिरफ्तारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महबूबा को दिल्ली में इस मुद्दे पर बोलना चाहिए था, जहां मीडिया की नजरें थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को हिरासत में लेने के खिलाफ हैं, क्योंकि बिना जनता के समर्थन के आतंकवाद का सामना नहीं किया जा सकता।