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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों में देरी पर जताई चिंता

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर चिंता जताई है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह निर्वाचित स्थानीय निकायों के कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले चुनाव की तैयारियां शुरू करे। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त निर्धारित की है। जानें और क्या कहा न्यायालय ने इस मामले में।
 

पंचायत चुनावों की तैयारी में देरी पर न्यायालय की टिप्पणी

लखनऊ, 5 अगस्त: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संविधान का पालन करते हुए निर्वाचित स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले चुनाव की तैयारियां शुरू की जाएं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने संजय कुमार शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।


अदालत ने यह भी कहा कि यदि समय से तैयारियां शुरू की जाएं, तो यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पंचायत चुनाव पांच साल के भीतर संपन्न हो जाएं। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने मई 2025 में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन 26 मई 2026 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव नहीं कराए जा सके।


राज्य सरकार के रिकॉर्ड की मांग करते हुए, अदालत ने कहा कि वह देरी के कारणों की जांच करेगी और देखेगी कि क्या यह सरकार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुआ या अधिकारियों की लापरवाही से। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।