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अशोक गहलोत ने ओबीसी आरक्षण पर उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं में ओबीसी आरक्षण के साथ हो रहे भेदभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि युवाओं के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। गहलोत ने भाजपा सरकार से अपील की कि वे इस अन्याय को रोकें और युवाओं को न्याय दिलाएं। उनके बयान ने राज्य में आरक्षण के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है।
 

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर चिंता जताई है।


गहलोत ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस विषय को उठाते हुए लिखा, 'राजस्थान में ओबीसी आरक्षण के साथ हो रहा यह लगातार खिलवाड़ अत्यंत चिंताजनक है।'


उन्होंने आगे कहा, 'कनिष्ठ लिपिक (एलडीसी) भर्ती में 21 प्रतिशत आरक्षण के बजाय केवल 15 प्रतिशत देना युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। चतुर्थ श्रेणी, वनपाल और द्वितीय श्रेणी की भर्तियों में भी इसी तरह से नियमों की अनदेखी कर आरक्षित वर्गों के साथ जानबूझकर अन्याय किया गया है।'


गहलोत ने भाजपा सरकार से अपील की कि 'रोस्टर के बहाने युवाओं के अधिकारों का हनन करना बंद करें। मुख्यमंत्री को तुरंत हस्तक्षेप कर आरक्षण से जुड़ी इन विसंगतियों को दूर करना चाहिए और युवाओं को न्याय दिलाना चाहिए।'