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अखिलेश यादव ने 'PDA' में महिलाओं को शामिल कर दी नई दिशा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 'PDA' के नारे में महिलाओं को शामिल कर एक नया दृष्टिकोण पेश किया है। उन्होंने 'आधी आबादी' को इस नारे का हिस्सा बनाते हुए महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 'स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना' की घोषणा की। यह कदम महिला वोट बैंक को साधने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जो जातिगत समीकरणों से परे जाकर लिंग आधारित न्याय को भी महत्व देता है।
 

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में नया कदम

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को 'PDA' के नारे को एक नया और समावेशी रूप दिया है। अब इस शब्द में 'A' का अर्थ 'आधी आबादी' (महिलाएं) भी होगा, जो पहले पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज मानी जाती थी। यादव ने बताया कि उनकी पार्टी महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 'स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना' लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।


पीडीए का नया अर्थ

अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान 'पीडीए' शब्द का उपयोग पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को संबोधित करने के लिए किया था। उन्होंने 'एक्स' पर अग्रणी महिलाओं के साथ अपनी पत्नी सांसद डिंपल यादव की तस्वीरें साझा करते हुए कहा, 'आधी आबादी की पूरी आजादी और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए हम हमेशा कटिबद्ध रहेंगे।'


राजनीतिक रणनीति का संकेत

उन्होंने कहा, 'जब परिवार, समाज और देश को मजबूत करने वालों को सम्मान मिलता है, तो उनका मान और मनोबल दोनों बढ़ता है। हम पीडीए में 'A' का मतलब 'आधी आबादी' मानते हैं, जिससे हर बच्ची, युवती और महिला को समान सम्मान मिलेगा।' पूर्व मुख्यमंत्री ने 'समाजवादी पेंशन' को फिर से लागू करने का भी आश्वासन दिया।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिला वोट बैंक को साधने की एक महत्वपूर्ण रणनीति है। 'आधी आबादी' को PDA में शामिल करके सपा ने यह संदेश दिया है कि उनकी राजनीति केवल जातिगत समीकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लिंग आधारित न्याय भी शामिल है।