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OTT प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई: 10 से 15 प्लेटफॉर्म्स की जांच जारी

हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 से 15 OTT प्लेटफॉर्म्स की जांच चल रही है, जिन पर गैरकानूनी और आपत्तिजनक सामग्री दिखाने का आरोप है। पहले भी कई प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है। सरकार ने 2025 में भी बड़े पैमाने पर बैन लगाया था। संसदीय समिति ने मौजूदा नियमों में खामियों की ओर इशारा किया है और डिजिटल कंटेंट की निगरानी के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा, फेक कंटेंट पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
 

OTT प्लेटफॉर्म्स की जांच का मामला


हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लगभग 10 से 15 OTT प्लेटफॉर्म्स जांच के दायरे में हैं। यह जानकारी संसदीय स्थायी समिति (कम्युनिकेशंस और आईटी) द्वारा प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी और आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित करने का आरोप है, जिसके चलते इनकी जांच की जा रही है।

पहले भी कई प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई
सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने समिति को बताया कि पहले 25 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया था, और इसके बाद 18 और प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई। वर्तमान में 10 से 15 प्लेटफॉर्म्स की जांच जारी है, और आवश्यकता पड़ने पर लगातार ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किए जा रहे हैं। फरवरी में, सरकार ने MoodXVIP, Koyal Playpro, Digi Movieplex, Feel और Jugnu जैसे पांच प्लेटफॉर्म्स को IT Rules 2021 के उल्लंघन के कारण बैन कर दिया था। इन पर अश्लील और यौन सामग्री दिखाने का आरोप था।

2025 में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती दिखाई है। 2025 के मध्य में भी बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 से अधिक ऐप्स को बैन किया गया था, जिनमें ULLU और ALTT जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स शामिल थे। इन पर भी अश्लील और नियमों के खिलाफ सामग्री प्रदर्शित करने के आरोप लगे थे।

नियमों में खामियां, सख्त निगरानी की आवश्यकता
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि ऑनलाइन मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए मौजूदा नियमों में कुछ कमियां हैं। ऐसे में डिजिटल कंटेंट के लिए एक मजबूत और व्यवस्थित निगरानी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोका जा सके।

फेक कंटेंट पर भी सख्त कार्रवाई
रिपोर्ट में प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट (PIB-FCU) के कार्यों की भी समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार, यह यूनिट फेक कंटेंट को रोकने में सक्रिय है और अब तक लगभग 1400 URLs को ब्लॉक किया जा चुका है।

10 मार्च 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसकी अगुवाई सुर्य कांत कर रहे थे, ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने PIB की फैक्ट चेक यूनिट को रद्द कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

बड़े इवेंट्स के दौरान बढ़ता है फेक कंटेंट
रिपोर्ट में बताया गया है कि फेक कंटेंट, जैसे फर्जी ऑडियो और वीडियो क्लिप्स, बड़े इवेंट्स के दौरान तेजी से फैलते हैं। इसमें सैन्य कार्रवाई, राजनीतिक घटनाएं, विरोध प्रदर्शन या कोई भी बड़ा मुद्दा शामिल हो सकता है, जो ऑनलाइन ट्रेंड करता है।

AI और एक्सपर्ट्स की मदद से होगा समाधान
समिति का मानना है कि फेक न्यूज और गलत जानकारी से निपटने के लिए मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ाने और क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार एक्सपर्ट्स की भर्ती करने की सिफारिश की गई है, ताकि कंटेंट को बेहतर तरीके से मॉनिटर किया जा सके.